नई दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की विदेशी मुद्रा स्वैप योजना के तहत 31 जुलाई 2026 तक 40.816 अरब अमेरिकी डॉलर (लगभग 40.82 अरब डॉलर) का निवेश जुटाया गया है। इसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) जमा का रहा, जिसने कुल राशि का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा प्रदान किया।
क्या है FCNR(B)?
FCNR(B) (Foreign Currency Non-Resident – Bank) ऐसा बैंक जमा खाता है, जिसमें अनिवासी भारतीय (NRI) विदेशी मुद्रा में धन जमा करते हैं। इस खाते में जमा राशि और ब्याज दोनों विदेशी मुद्रा में ही रहते हैं, जिससे विनिमय दर के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो जाता है।
प्रमुख आंकड़े
कुल जुटाई गई राशि: 40.816 अरब डॉलर
FCNR(B) जमा: 36.725 अरब डॉलर
कुल राशि में FCNR(B) की हिस्सेदारी: 90 प्रतिशत से अधिक
योजना का उद्देश्य
RBI की इस योजना का मकसद देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाना, डॉलर की उपलब्धता मजबूत करना और विदेशी मुद्रा भंडार को सहारा देना है। इस योजना में बैंकों और अनिवासी भारतीयों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली है।
अर्थव्यवस्था पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इस योजना से:
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी।
रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है।
बैंकों को विदेशी मुद्रा में अधिक संसाधन उपलब्ध होंगे।
वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच वित्तीय स्थिरता को समर्थन मिलेगा।
RBI के ताजा आंकड़े बताते हैं कि इस योजना में FCNR(B) जमा सबसे प्रमुख स्रोत बनकर उभरे हैं, जिससे यह स्पष्ट होता है कि अनिवासी भारतीयों ने भारतीय बैंकिंग प्रणाली पर भरोसा जताते हुए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा जमा कराई है।

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