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भारत को मिला बड़ा एयरोस्पेस बूस्ट, HAL-सफ्रान बनाएंगे ‘अरावली’ हेलिकॉप्टर इंजन

 

नई दिल्ली। भारत की स्वदेशी हेलिकॉप्टर इंजन क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड और फ्रांस की सफरान हेलिकॉप्टर इंजन कंपनी ने अपनी संयुक्त कंपनी सफहल हेलिकॉप्टर इंजन के जरिए नई पीढ़ी के हाई-पावर हेलिकॉप्टर इंजन के विकास, निर्माण और जीवनचक्र सहयोग के लिए अंतिम करार किया है। इस इंजन का नाम ‘अरावली’ रखा गया है।



अरावली इंजन 3,500 से 4,000 शाफ्ट हॉर्सपावर श्रेणी का टर्बोशाफ्ट इंजन होगा। इसे हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के लगभग 13 टन वर्ग के भारतीय बहुउद्देश्यीय हेलिकॉप्टर और उसके नौसैनिक संस्करण डेक-बेस्ड मल्टी-रोल हेलिकॉप्टर के लिए विकसित किया जा रहा है।


इस परियोजना की सबसे बड़ी अहमियत यह है कि भारत को भविष्य के मध्यम श्रेणी के सैन्य हेलिकॉप्टरों के लिए महत्वपूर्ण इंजन तकनीक विकसित करने की क्षमता मिलेगी। करार में केवल इंजन का विकास ही नहीं, बल्कि निर्माण, आपूर्ति और दीर्घकालिक रखरखाव सहयोग भी शामिल है।


भारत पहले भी सफरान के साथ मिलकर ‘शक्ति’ इंजन विकसित कर चुका है, जिसका इस्तेमाल ध्रुव, रुद्र और प्रचंड जैसे हेलिकॉप्टरों में किया जाता है। अरावली परियोजना उससे कहीं अधिक शक्तिशाली इंजन श्रेणी में प्रवेश का प्रयास है।


रक्षा क्षेत्र में इंजन तकनीक को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसलिए अरावली केवल एक हेलिकॉप्टर इंजन परियोजना नहीं, बल्कि भारत की स्वदेशी एयरोस्पेस प्रणोदन क्षमता को अगले स्तर तक ले जाने की कोशिश है।


अब चुनौती इस तकनीक को समय पर विकसित करने, परीक्षण और प्रमाणन पूरा करने तथा बड़े पैमाने पर विश्वसनीय उत्पादन क्षमता खड़ी करने की होगी।

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