सहारनपुर। पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के बीच बढ़ती तल्खी के बीच सहारनपुर में अखिलेश यादव की प्रस्तावित रैली स्थगित हो गई है। समाजवादी पार्टी ने 6 सितंबर की रैली टालने की आधिकारिक वजह भारी बारिश की आशंका और मौसम विभाग का अलर्ट बताया है। रैली के आयोजक चौधरी रुद्रसैन के मुताबिक नई तारीख अखिलेश यादव से चर्चा के बाद तय की जाएगी।
लेकिन रैली स्थगित होते ही इसके पीछे की राजनीतिक वजह को लेकर सवाल उठने लगे हैं। राष्ट्रीय लोकदल ने दावा किया है कि चौधरी परिवार को लेकर अखिलेश यादव की ‘चवन्नी से रुपया’ वाली टिप्पणी के बाद पश्चिमी यूपी में नाराजगी बढ़ी और 36 बिरादरी के बीच विरोध का माहौल बना। रालोद का कहना है कि इसी जनाक्रोश और बहिष्कार के दबाव का असर रैली पर पड़ा।
विवाद की पृष्ठभूमि में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच हालिया बयानबाजी भी है। जयंत ने अखिलेश की टिप्पणी पर पलटवार करते हुए इसे चौधरी परिवार और जाट समाज के सम्मान से जोड़ दिया था। इसके बाद पश्चिमी यूपी में दोनों दलों के बीच राजनीतिक दूरी और स्पष्ट दिखाई देने लगी।
दिलचस्प यह है कि रैली स्थगित होने के कुछ घंटे बाद ही अखिलेश यादव के 2 सितंबर को सहारनपुर पहुंचने का कार्यक्रम सामने आया। वह सपा महासचिव चौधरी रुद्रसैन के आवास पर जाएंगे। इससे राजनीतिक चर्चाओं को और हवा मिली है।
फिलहाल मौसम सपा की आधिकारिक वजह है, जबकि 36 बिरादरी का विरोध रालोद का राजनीतिक दावा। इन दोनों में वास्तविक कारण कितना है, इसका निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है। लेकिन इतना साफ है कि 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सहारनपुर पश्चिमी यूपी में सपा और रालोद की बढ़ती दूरी का बड़ा राजनीतिक मंच बन चुका है।

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