आबकारी के 'कुबेर' धर्मेंद्र भदौरिया पर ED का कसता शिकंजा, विशेष PMLA कोर्ट ने जारी किया समन; 28 करोड़ की काली कमाई का पूरा लेखा-जोखा

प्रणव बजाज

इंदौर/भोपाल : मध्य प्रदेश के सबसे बड़े और चर्चित भ्रष्टाचार मामलों में से एक, अलीराजपुर के पूर्व जिला आबकारी अधिकारी (Retd. District Excise Officer) धर्मेंद्र सिंह भदौरिया के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है。 ED के भोपाल जोनल ऑफिस ने इंदौर की विशेष पीएमएलए (PMLA) कोर्ट में आधिकारिक तौर पर आरोप पत्र (Prosecution Complaint) दाखिल कर दिया है। इस पर सख्त रुख अपनाते हुए विशेष कोर्ट ने आरोपी पूर्व अधिकारी को अदालत में हाजिर होने के लिए औपचारिक समन और नोटिस जारी कर दिए हैं।



कानूनी जानकारों के मुताबिक, समन जारी होने के बाद नोटिस की आधिकारिक तामीली (Delivery) की जा रही है, जिसके बाद आगामी 15 से 30 दिनों के भीतर (अगस्त के अंतिम हफ्तों तक) भदौरिया को विशेष कोर्ट के सामने व्यक्तिगत रूप से पेश होना पड़ेगा।


'मनी लॉन्ड्रिंग' का नया ब्यूरोक्रेटिक मॉडल: बच्चों के नाम पर फिल्मों में निवेश

जांच में सामने आया है कि धर्मेंद्र सिंह भदौरिया ने सीधे रिश्वत का पैसा रखने के बजाय भ्रष्टाचार की कमाई को छुपाने के लिए अपनी बेटी अपूर्वा भदौरिया और बेटे सूर्यांश भदौरिया का इस्तेमाल किया।

फिल्मी कनेक्शन: भदौरिया का बेटा सूर्यांश इस काली कमाई के पैसे को फिल्म इंडस्ट्री (Entertainment Sector) में बड़े पैमाने पर इन्वेस्ट कर रहा था ताकि गंदे पैसे को वैध दिखाया जा सके।

करोड़ों का लोन: दस्तावेजों की छानबीन में यह भी सामने आया कि बेटा सूर्यांश और बेटी अपूर्वा ने जितेंद्र चौधरी नाम के एक व्यक्ति को ₹2.85 करोड़ का मोटा लोन (ब्याज पर पैसा) भी दे रखा था।

ED ने इसी मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क को आधार बनाकर ₹18.20 करोड़ की चल-अचल संपत्तियों को पहले ही कुर्क (Attach) कर लिया था, जिसका ठोस हिसाब भदौरिया नहीं दे पाए।


 पुराना लेखा-जोखा: 38 साल की नौकरी में ₹2 करोड़ वेतन, रेड में निकले ₹28.81 करोड़

लोकायुक्त पुलिस (SPE Indore) द्वारा इंदौर, ग्वालियर और उत्तर प्रदेश के इटावा सहित कुल 8 ठिकानों पर की गई छापेमारी ने भ्रष्टाचार के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए थे। भदौरिया ने 1987 से 2025 तक अपनी पूरी नौकरी के दौरान वैध सैलरी से मात्र ₹2 करोड़ कमाए थे, लेकिन उनके पास से 829% अधिक संपत्ति बरामद की गई।

लोकायुक्त और बैंक लॉकर की जांच में जब्त की गई कुल संपत्ति ₹28.81 करोड़ आंकी गई थी, जिसका नामवार और वस्तुवार ब्यौरा इस प्रकार है:


1. सोने-चांदी और नकदी का अंबार

भारी मात्रा में सोना: कुल 4.22 किलोग्राम सोना (कीमत करीब ₹5.48 करोड़) बरामद हुआ, जिसमें से अकेले बेटी अपूर्वा के केनरा बैंक (देवास नाका) के लॉकर से 2 किलो और बेटे सूर्यांश के एचडीएफसी बैंक (पलासिया) के लॉकर से 1.31 किलो सोना-डायमंड मिला था।

चांदी और कैश: ठिकानों से ₹1.13 करोड़ की भारी-भरकम नकदी और 5,000 यूरो की विदेशी मुद्रा के साथ 7.12 किलोग्राम चांदी मिली।


2. आलीशान अचल संपत्तियां और वीआईपी गाड़ियां

इटैलियन महल (इंदौर): इंदौर के मालवा काउंटी/काउंट्रीवॉक टाउनशिप में करीब ₹10 करोड़ की लागत से तीन मंजिला आलीशान बंगला (4,700 वर्ग फीट) बन रहा था, जिसका फर्नीचर चीन से इम्पोर्ट होना था।

फ्लैट्स और ऑफिस: पलासिया स्थित कैलाश कुंज बिल्डिंग में 3 लग्जरी फ्लैट्स (नंबर 201, 402, 403) और बिजनेस स्काई पार्क में कई महंगे कमर्शियल ऑफिस स्पेस मिले।

ग्वालियर और इटावा कनेक्शन: ग्वालियर के इंद्रमणि नगर में आलीशान पैतृक आवास और उत्तर प्रदेश के इटावा में पैतृक जमीनों के दस्तावेज मिले।

लक्जरी गाड़ियों का काफिला: वोल्वो, फॉर्च्यूनर और दो इनोवा कारों सहित कई मॉडिफाइड सुपरबाइक्स मिलीं। खास बात यह थी कि भदौरिया के काफिले की अधिकांश गाड़ियों का नंबर "0045" था।

अब आगे क्या होगा?

ED की ओर से कोर्ट में चार्जशीट पेश होने और समन जारी होने के बाद धर्मेंद्र सिंह भदौरिया की मुश्किलें बेहद बढ़ गई हैं। अब कोर्ट में उन्हें इन सभी बेनामी संपत्तियों, बच्चों के बैंक खातों और फिल्मी निवेश का एक-एक लीगल सोर्स साबित करना होगा, नाकाम रहने पर उनकी पूरी संपत्ति हमेशा के लिए राजसात (सरकारी संपत्ति) कर ली जाएगी और PMLA कानून के तहत उन्हें लंबी जेल हो सकती है।

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