मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह के कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर दिए गए विवादित बयान के मामले में आज, 31 अगस्त 2026, सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। सुनवाई से ठीक पहले मध्य प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देने का निर्णय लिया है। कैबिनेट का फैसला अब राज्यपाल के पास भेजा गया है।
क्या है पूरा मामला?
मई 2025 में महू में एक कार्यक्रम के दौरान विजय शाह ने ऑपरेशन सिंदूर की ब्रीफिंग करने वाली सेना अधिकारी कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। बयान के बाद देशभर में राजनीतिक और सामाजिक विरोध हुआ। शाह ने बाद में कई बार माफी भी मांगी।
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वतः संज्ञान लेकर प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। बाद में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर तीन सदस्यीय विशेष जांच दल गठित हुआ। जांच पूरी होने के बाद विशेष जांच दल ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(क) के तहत शाह पर मुकदमा चलाने के लिए अभियोजन स्वीकृति मांगी।
सुप्रीम कोर्ट पहले लगा चुका है फटकार
अभियोजन स्वीकृति पर फैसला टलता रहा तो सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई। जनवरी में अदालत ने निर्णय लेने को कहा था और मई में देरी पर नाराजगी जताते हुए सरकार को चार सप्ताह में फैसला करने का निर्देश दिया था।
अब सबसे बड़ा सवाल
कैबिनेट द्वारा अभियोजन की मंजूरी नहीं देने के फैसले के बाद गेंद राज्यपाल के पाले में है। आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अदालत सरकार के इस निर्णय और अब तक हुई देरी पर क्या रुख अपनाती है, इस पर सबकी नजर है। मामला सिर्फ विजय शाह के खिलाफ मुकदमे का नहीं, बल्कि यह सवाल भी उठा रहा है कि क्या किसी मंत्री के मामले में अभियोजन की प्रक्रिया सामान्य नागरिक से अलग हो सकती है?

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