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सफेद चीनी सिर्फ शरीर नहीं, त्वचा के लिए भी बन सकती है परेशानी

 

ज्यादा मीठे के सेवन से मुंहासों समेत कुछ त्वचा समस्याओं का जोखिम बढ़ने के संकेत, विशेषज्ञों ने मात्रा नियंत्रित रखने की दी सलाह


नई दिल्ली। चीनी हमारे रोजमर्रा के खान-पान का हिस्सा है। चाय, मिठाई, शीतल पेय, बिस्कुट और पैकेट वाले खाद्य पदार्थों के जरिए कई लोग जरूरत से ज्यादा चीनी का सेवन कर लेते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर केवल वजन और रक्त शर्करा पर ही नहीं, बल्कि त्वचा पर भी पड़ सकता है।



त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार अधिक ग्लाइसेमिक आहार यानी ऐसे खाद्य पदार्थ जो रक्त में शर्करा तेजी से बढ़ाते हैं, कुछ लोगों में मुंहासों की समस्या को बढ़ा सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका असर एक जैसा नहीं होता और चीनी को त्वचा की हर समस्या का अकेला कारण मानना सही नहीं है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन की सलाह है कि भोजन और पेय पदार्थों में मिलने वाली मुक्त चीनी कुल दैनिक ऊर्जा का 10 प्रतिशत से कम होनी चाहिए। इसे 5 प्रतिशत से कम रखने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।


विशेषज्ञों का कहना है कि केवल चाय में डाली गई चीनी ही नहीं, बल्कि मीठे पेय, मिठाई और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से मिलने वाली अतिरिक्त चीनी पर भी ध्यान देना चाहिए।


सवाल यह है कि हम रोज कितनी चीनी खा रहे हैं और क्या उसका हिसाब रखते हैं? संतुलित आहार, पर्याप्त पानी, नींद और त्वचा की उचित देखभाल के साथ अत्यधिक मीठे का सेवन कम करना बेहतर विकल्प है।

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