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भारत में करीब 35% बच्चों में फैटी लिवर? बढ़ता मोटापा बना बड़ी वजह

 


शोध में बच्चों में फैटी लिवर की दर 35.4% तक; मोटापे से ग्रस्त बच्चों में जोखिम कई गुना ज्यादा


नई दिल्ली। भारत में बच्चों में फैटी लिवर की समस्या अब चिंता का विषय बन रही है। एक भारतीय व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में बच्चों में गैर-अल्कोहल फैटी लिवर रोग की अनुमानित व्यापकता 35.4% पाई गई। वहीं मोटापे से ग्रस्त बच्चों में यह आंकड़ा करीब 63.4% था, जबकि गैर-मोटापाग्रस्त बच्चों में लगभग 12.4


%।


भारतीय बाल-गैस्ट्रो विशेषज्ञों की 2024 की सिफारिशों के अनुसार भारतीय बच्चों में इस बीमारी का संबंध बढ़ते वजन के साथ-साथ कैलोरी वाले प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ, मीठे पेय, ज्यादा समय तक बैठे रहना और शारीरिक गतिविधि की कमी से भी जुड़ा है। बीमारी शुरुआत में अक्सर बिना स्पष्ट लक्षण के रहती है, इसलिए इसका समय पर पता लगाना महत्वपूर्ण है।


भारतीय बाल रोग विशेषज्ञों के दिशानिर्देशों में मोटापे से ग्रस्त 10 वर्ष से अधिक उम्र के बच्चों में फैटी लिवर समेत अन्य चयापचय संबंधी समस्याओं की जांच की सलाह दी गई है।


बचाव कैसे?


बच्चों के भोजन में अत्यधिक मीठे पेय, जंक फूड और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि बढ़ाना और स्क्रीन पर बिताया समय घटाना महत्वपूर्ण है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक यकृत एंजाइम की जांच और पेट के अल्ट्रासाउंड की सलाह दे सकते हैं।


सबसे बड़ा सवाल: क्या बच्चों की बदलती खान-पान और जीवनशैली आने वाली पीढ़ी के लिए लीवर की नई समस्या पैदा कर रही है?

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