अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के निदेशक जॉन रैटक्लिफ का 25 अगस्त को अचानक मॉस्को पहुंचना अंतरराष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन गया है। यह उनके सीआईए प्रमुख बनने के बाद रूस की पहली सार्वजनिक रूप से ज्ञात यात्रा बताई जा रही है। अमेरिकी सैन्य विमान और राजनयिक वाहनों की मौजूदगी के बाद उनकी यात्रा की खबर सामने आई, लेकिन अमेरिका और रूस दोनों ने दौरे के उद्देश्य पर आधिकारिक रूप से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है
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इस दौरे का समय बेहद महत्वपूर्ण है। यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए अमेरिका के प्रयासों में ठहराव है और रूस-यूक्रेन के बीच तनाव बना हुआ है। ऐसे में सीआईए प्रमुख का सीधे मॉस्को जाना किसी सामान्य राजनयिक यात्रा से अलग माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल है कि रैटक्लिफ किससे मिले और बातचीत का एजेंडा क्या था? अमेरिकी मीडिया में ऐसी अटकलें हैं कि चर्चा यूक्रेन युद्ध, रूस की संभावित सैन्य तैयारियों, नाटो के साथ तनाव या व्यापक अमेरिका-रूस संबंधों से जुड़ी हो सकती है। कुछ रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि अमेरिकी खुफिया जानकारी के अनुसार रूस यूक्रेन युद्ध के लिए संभावित सैन्य लामबंदी की शुरुआती तैयारी कर रहा है।
यह यात्रा बैक-चैनल संवाद की संभावना जरूर बढ़ाती है, लेकिन अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि मॉस्को में कोई समझौता या शांति वार्ता हुई। क्रेमलिन ने भी प्रस्तावित अमेरिकी वार्ता की जानकारी से इनकार किया है।
यानी फिलहाल रैटक्लिफ का मॉस्को दौरा जितना गुप्त है, उसके पीछे का असली संदेश भी उतना ही रहस्यमय बना हुआ है।

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