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विदेश दौरे या सरकारी फिजूलखर्ची?

 

P.M छह महीने में 13 देशों पर ₹74.59 करोड़, संसद में सरकार ने दिया पूरा हिसाब


नई दिल्ली। संसद में पेश आंकड़ों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2026 के विदेश दौरों पर हुए खर्च को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार फरवरी से जुलाई 2026 के बीच 13 देशों की यात्राओं पर करीब ₹74.59 करोड़ खर्च हुए। इनमें नॉर्वे यात्रा सबसे महंगी रही, जिस पर लगभग ₹17.46 करोड़ खर्च दर्ज किया गया। 



खर्च का बड़ा हिसाब



नॉर्वे : ₹17.46 करोड़


इज़राइल : ₹11.92 करोड़


सेशेल्स : ₹8.22 करोड़


स्वीडन : ₹6.33 करोड़


मलेशिया : ₹5.57 करोड़


अन्य देशों (यूएई, नीदरलैंड, इटली, फ्रांस, स्लोवाकिया, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड आदि) पर भी करोड़ों रुपये का खर्च दर्ज किया गया। 




विपक्ष के निशाने पर सरकार


संसद में आंकड़े सामने आने के बाद विपक्ष ने सवाल उठाया कि जब देश महंगाई, बेरोज़गारी और विकास योजनाओं के लिए संसाधनों की चुनौती झेल रहा है, तब विदेश दौरों पर इतना बड़ा सरकारी खर्च कितना उचित है।


सरकार का पक्ष


सरकार का कहना है कि प्रधानमंत्री के विदेश दौरे केवल यात्रा नहीं, बल्कि कूटनीतिक संबंध, निवेश, व्यापार, रक्षा सहयोग और भारत के वैश्विक हितों को आगे बढ़ाने का माध्यम हैं। इसलिए इन खर्चों को देश के दीर्घकालिक हितों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। 


बौद्धिक प्रतिकार का सवाल


**यदि विदेश यात्राओं से देश को निवेश, व्यापार और रणनीतिक लाभ मिल रहे हैं, तो उनका विस्तृत सार्वजनिक आकलन भी सामने आना चाहिए। आखिर जनता को यह जानने का अधिकार है कि खर्च के बदले देश को क्या हासिल हुआ?**

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