प्रयागराज। कोडीन युक्त कफ सिरप की कथित अवैध बिक्री और तस्करी के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में स्पष्ट किया है कि केवल वैध दवा लाइसेंस होना आरोपियों को एनडीपीएस अधिनियम की कार्रवाई से स्वतः संरक्षण नहीं देता।
मुख्य आरोपी भोला प्रसाद की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कहा गया कि आरोपियों के पास औषधि एवं प्रसाधन अधिनियम के तहत लाइसेंस जरूर था, लेकिन आरोप है कि लाइसेंस की शर्तों का पालन नहीं किया गया। सरकार के मुताबिक सिरप का उपयोग चिकित्सकीय जरूरत के बजाय नशीले पदार्थ के रूप में किया गया और इसी कथित अवैध गतिविधि के आधार पर एनडीपीएस अधिनियम की धाराएं लगाई गई हैं।
लाइसेंस था, लेकिन इस्तेमाल किसके लिए?
सरकार का तर्क है कि दवा बेचने का लाइसेंस चिकित्सकीय उपयोग के लिए था। जांच में बड़ी मात्रा में कोडीन युक्त सिरप की खरीद-बिक्री और वितरण की बात सामने आई है। अभियोजन का दावा है कि लेन-देन में आवश्यक वैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और सिरप को नशे के कारोबार की श्रृंखला में मोड़ा गया।
सरकार ने अदालत में यह भी दावा किया कि कथित तस्करी का नेटवर्क कई राज्यों तक फैला था और इसकी आपूर्ति पड़ोसी देश बांग्लादेश तक किए जाने के आरोप हैं। हालांकि इन आरोपों का अंतिम निर्धारण मुकदमे के दौरान साक्ष्यों के आधार पर होगा।
बचाव पक्ष की दलील भी महत्वपूर्ण
आरोपियों की ओर से तर्क दिया गया कि उनके पास वैध थोक दवा लाइसेंस था और कोडीन युक्त कफ सिरप निर्धारित औषधीय श्रेणी में आता है। इसलिए केवल इसकी खरीद-बिक्री को एनडीपीएस अपराध नहीं माना जा सकता।
यह विवाद कानूनी रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि पूर्व में इलाहाबाद हाईकोर्ट के कुछ फैसलों में निर्धारित मात्रा में कोडीन वाली चिकित्सकीय कफ सिरप को एनडीपीएस अधिनियम के अपवादों के तहत माना गया है।
असली सवाल: दवा लाइसेंस या नशीले कारोबार की ढाल?
मौजूदा मामले में अदालत के सामने मूल प्रश्न यही है कि क्या वैध दवा लाइसेंस के बावजूद उसके नियमों का उल्लंघन कर औषधि को नशीले कारोबार में इस्तेमाल किया गया था?
भोला प्रसाद की जमानत पर सुनवाई पूरी हो चुकी है। मामले में 80 से अधिक आरोपियों की जमानत अर्जियों पर सुनवाई चल रही है। अदालत प्रत्येक आरोपी की भूमिका और जांच में सामने आए साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग निर्णय करेगी।
यानी मामला सिर्फ इस बात का नहीं है कि लाइसेंस था या नहीं, बल्कि यह भी है कि लाइसेंस की आड़ में दवा का इस्तेमाल किस उद्देश्य से और किस तरीके से किया गया।

Post a Comment