डिजिटल निवेश की बढ़ती पहुंच ने बदली युवाओं की सोच, शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड दोनों की ओर बढ़ा रुझान
देश में युवा निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हाल के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 तक राष्ट्रीय शेयर बाजार के पंजीकृत निवेशकों में जेन-ज़ेड (युवा पीढ़ी) की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जो वित्त वर्ष 2020 में करीब 25 प्रतिशत थी। यह बदलाव डिजिटल निवेश मंचों, वित्तीय जागरूकता और व्यवस्थित निवेश योजनाओं की बढ़ती लोकप्रियता का परिणाम माना जा रहा है
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विशेषज्ञों के अनुसार, जेन-ज़ेड निवेशक केवल सीधे शेयर खरीदने तक सीमित नहीं हैं। बड़ी संख्या में युवा नियमित मासिक निवेश योजना के माध्यम से इक्विटी आधारित म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं। इससे उन्हें लंबी अवधि में संपत्ति बनाने का अवसर मिल रहा है और जोखिम भी अपेक्षाकृत संतुलित रहता है।
वहीं, कुछ युवा निवेशक सीधे शेयर बाजार में निवेश कर अधिक रिटर्न की संभावना तलाश रहे हैं। हालांकि इसमें लाभ के साथ जोखिम भी अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि पर्याप्त जानकारी और शोध के बिना शेयर बाजार में निवेश करना नुकसान का कारण बन सकता है।
वित्तीय सलाहकारों के अनुसार, नौकरीपेशा और नए निवेशकों के लिए म्यूचुअल फंड की नियमित मासिक निवेश योजना अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प मानी जाती है, जबकि बाजार की समझ रखने वाले निवेशक सीधे शेयरों में भी निवेश कर सकते हैं। निवेश का चुनाव व्यक्ति की आय, जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि जेन-ज़ेड निवेशकों की बढ़ती भागीदारी भारतीय पूंजी बाजार के विस्तार का संकेत है। हालांकि वे यह भी सलाह देते हैं कि किसी भी निवेश निर्णय से पहले पूरी जानकारी जुटाना, जोखिम को समझना और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

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