नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने युवा राजनयिकों से विदेश में अपनी तैनाती वाले देशों के स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत और सीधा जुड़ाव बनाने का आह्वान किया है। नई दिल्ली के सेवा तीर्थ में भारतीय विदेश सेवा के 2025 बैच के प्रशिक्षु अधिकारियों से बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की कूटनीति को केवल सरकारी और पारंपरिक राजनयिक दायरों तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों को अपने नेटवर्क का विस्तार करने और स्थानीय लोगों के साथ संवाद बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया। उनका जोर इस बात पर रहा कि किसी देश को समझने के लिए वहां की सरकार और प्रशासन के साथ संपर्क के अलावा समाज के अलग-अलग वर्गों से जुड़ना भी जरूरी है।
मोदी ने युवा अधिकारियों से अपनी पोस्टिंग वाले देशों की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक परिस्थितियों को करीब से समझने की अपेक्षा जताई। स्थानीय समुदायों के साथ मजबूत संबंध भारत के बारे में बेहतर समझ विकसित करने और दोनों देशों के बीच भरोसा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।
आज के दौर में कूटनीति केवल औपचारिक बैठकों और सरकारी वार्ताओं तक सीमित नहीं है। शिक्षा, संस्कृति, व्यापार, तकनीक, प्रवासी भारतीय समुदाय और युवा संपर्क भी देशों के रिश्तों को प्रभावित करते हैं। ऐसे में युवा राजनयिकों की भूमिका और व्यापक हो गई है।
प्रधानमंत्री की यह सलाह भारतीय विदेश सेवा के नए अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश के रूप में देखी जा रही है कि विदेश में भारत का प्रतिनिधित्व करते समय स्थानीय समाज को समझना और उससे संवाद करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना सरकारी स्तर पर संबंध बनाए रखना।
युवा राजनयिकों से यह अपेक्षा भारत की विदेश नीति में जन-केंद्रित संपर्क और मजबूत वैश्विक साझेदारी की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

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