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पीएम मोदी से शिवराज की शिकायत के बाद भोपाल में हलचल, मध्यप्रदेश सरकार ने दी सफाई

 

प्रणव बजाज

कृषि कार्यक्रमों में बुलावे से लेकर मूंग खरीदी तक—शिवराज और मोहन सरकार के बीच बढ़ता दबाव ?


मध्यप्रदेश में वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित कर सरकार किसानों के बीच अपनी योजनाओं और उपलब्धियों का संदेश दे रही है, लेकिन इसी बीच मूंग खरीदी का मुद्दा राज्य की भाजपा सरकार के लिए राजनीतिक चुनौती बन गया है। खास बात यह है कि इस विवाद में केंद्र में बैठे मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान की सक्रिय भूमिका सामने आई है।



मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विधानसभा में स्वयं कहा था कि वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने सदन में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यों की भी सराहना की थी।


लेकिन अब किसान आंदोलन के बीच मूंग खरीदी का सवाल दोनों सरकारों के बीच समन्वय की परीक्षा बन गया है।


मूंग खरीदी पर शिवराज का पत्र


29 जुलाई को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश में मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का मुद्दा उठाया। इससे पहले प्रदेश के कृषि मंत्री ऐदल सिंह कंसाना ने केंद्र को पत्र भेजकर ग्रीष्मकालीन मूंग के उपार्जन का लक्ष्य बढ़ाने का अनुरोध किया था।


यह घटनाक्रम उस समय सामने आया जब मूंग खरीदी को लेकर किसान आंदोलन कर रहे थे। भोपाल में किसानों के प्रदर्शन और बैरिकेड तोड़े जाने की खबरों के बीच शिवराज की चिट्ठी ने मामले को और राजनीतिक महत्व दे दिया।


केंद्र ने दिया 4.54 लाख मीट्रिक टन का लक्ष्य


उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार केंद्र की ओर से मध्यप्रदेश को 4.54 लाख मीट्रिक टन मूंग खरीद का लक्ष्य दिया गया था। प्रदेश सरकार की ओर से इसे और बढ़ाने की मांग की गई। यानी विवाद केवल किसान और राज्य सरकार के बीच नहीं रहा, बल्कि केंद्र से अतिरिक्त खरीदी की अनुमति हासिल करने का सवाल भी इसमें जुड़ गया।


यहीं से सवाल उठता है कि यदि प्रदेश में किसान बड़ी मात्रा में मूंग उत्पादन कर रहे हैं तो सरकारी खरीदी की सीमा तय करने में केंद्र और राज्य के बीच पहले से बेहतर तालमेल क्यों नहीं बनाया गया?


‘कृषक कल्याण वर्ष’ और जमीन पर किसान


सरकार ने पूरे वर्ष किसानों को केंद्र में रखने का दावा किया है। जुलाई में इंदौर से ‘बलराम कृषि महोत्सव-2026’ की शुरुआत भी की गई। सरकार का उद्देश्य आधुनिक खेती, सिंचाई, कृषि तकनीक और किसानों की आय बढ़ाने पर जोर देना बताया गया।


लेकिन दूसरी ओर मूंग की सरकारी खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन यह सवाल खड़ा करता है कि बड़े आयोजनों और घोषणाओं से आगे बढ़कर किसान की उपज को उचित मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था कितनी मजबूत है?


यही इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक प्रश्न है।


शिवराज-मोहन संबंधों पर क्यों उठ रहे सवाल?


शिवराज सिंह चौहान लंबे समय तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री रहे हैं और वर्तमान में केंद्र में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री हैं। मोहन यादव उनके बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। दोनों नेता सार्वजनिक मंचों पर एक-दूसरे के कार्यों की प्रशंसा करते रहे हैं।


मार्च 2026 में दोनों की दिल्ली में मुलाकात भी हुई थी। उस बैठक में मध्यप्रदेश के कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई थी तथा किसानों से संबंधित कई मामलों पर केंद्र और राज्य के बीच सहमति बनी थी।


अप्रैल में रायसेन में आयोजित राष्ट्रीय स्तर के उन्नत कृषि महोत्सव को लेकर भी शिवराज की पहल पर मुख्यमंत्री मोहन यादव की भागीदारी तय की गई थी।


इसलिए तस्वीर पूरी तरह टकराव की नहीं है। लेकिन मूंग खरीदी जैसे मुद्दे यह जरूर दिखाते हैं कि किसान नीति के क्रियान्वयन में केंद्र और राज्य के बीच मतभेद की गुंजाइश मौजूद है।


बलराम कृषि महोत्सव में खराब भोजन ने भी उठाए सवाल


कृषक कल्याण वर्ष के कार्यक्रमों के बीच राजगढ़ में बलराम कृषि महोत्सव के दौरान किसानों को परोसे गए भोजन में फफूंद लगी सब्जियां मिलने की खबर ने भी प्रशासनिक व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े किए हैं। जिला पंचायत अध्यक्ष ने मामले में कलेक्टर से जांच की मांग की है। कार्यक्रम में प्रदेश सरकार के दो मंत्री भी मौजूद थे।


एक तरफ मंचों से किसान सम्मान और कल्याण की बातें हो रही हैं, दूसरी तरफ किसान आंदोलन, मूंग खरीदी और कार्यक्रमों में भोजन की गुणवत्ता जैसे सवाल सरकार की जमीनी व्यवस्था की परीक्षा ले रहे हैं।


असली सवाल


मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के सामने अब चुनौती केवल योजनाओं की घोषणा करने की नहीं, बल्कि किसान को उसका वास्तविक लाभ पहुंचाने की है।


क्या ‘कृषक कल्याण वर्ष’ केवल सरकारी आयोजनों तक सीमित रहेगा या मूंग जैसे मामलों में किसान की उपज की पर्याप्त सरकारी खरीदी सुनिश्चित होगी?


और सबसे बड़ा सवाल—


जब केंद्र में मध्यप्रदेश का ही एक पूर्व मुख्यमंत्री कृषि मंत्री है, तब प्रदेश के किसानों की खरीदी सीमा बढ़ाने के लिए राज्य सरकार को अलग से दबाव क्यों बनाना पड़ा?


यह सवाल आने वाले दिनों में मध्यप्रदेश की राजनीति में और बड़ा हो सकता है।


तथ्य-जांच


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से शिवराज सिंह चौहान द्वारा मध्यप्रदेश में कृषि कार्यक्रमों में निमंत्रण न मिलने की शिकायत और प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा मध्यप्रदेश सरकार से इस पर जवाब मांगे जाने का दावा फिलहाल उपलब्ध विश्वसनीय सार्वजनिक स्रोतों से स्वतंत्र रूप से पुष्ट नहीं हो सका है। इसलिए इसे समाचार में स्थापित तथ्य के बजाय अपुष्ट राजनीतिक दावा मानकर ही प्रस्तुत किया जाना चाहिए।

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