सरकारी जमीन खोदी, अनुमति से 26,407 घनमीटर ज्यादा मुरम निकली!

 

रिंगनोदिया में खनन का बड़ा खेल उजागर, एडीएम रिकेश वैश्य ने लगाया 7.92 करोड़ का अर्थदंड

प्रणव बजाज


इंदौर। सांवेर तहसील के ग्राम रिंगनोदिया में शासकीय जमीन पर मुरम खनन का मामला प्रशासनिक कार्रवाई के बाद बड़ा मुद्दा बन गया है। खनिज विभाग की जांच में अनुमति की तुलना में भारी मात्रा में अतिरिक्त खनन पाए जाने के बाद एडीएम रिकेश वैश्य ने 6 मार्च 2026 को बड़ा आदेश जारी किया। मेसर्स आकाश इंटरप्राइजेस सहित आठ अनावेदकों पर कुल 7 करोड़ 92 लाख 25 हजार 100 रुपये का संयुक्त अर्थदंड लगाया गया है।



मामले में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि ई-खनिज पोर्टल पर उपलब्ध वैध अनुमति की मात्रा करीब 12,293.04 घनमीटर थी, जबकि मौके पर कुल 38,700.729 घनमीटर मुरम खनन पाया गया। यानी प्रशासनिक आकलन के अनुसार 26,407.689 घनमीटर अतिरिक्त खनन सामने आया।




सड़क निर्माण की अनुमति बनी खनन का कवच?


मेसर्स आकाश इंटरप्राइजेस को शासकीय सड़क निर्माण कार्य पैकेज एमपी-17704 के लिए मुरम की अस्थायी खनन अनुमति दी गई थी।


सड़क निर्माण के लिए दी गई अनुमति का उद्देश्य निर्धारित निर्माण कार्य में खनिज का उपयोग करना था। लेकिन जांच में स्वीकृत मात्रा और मौके पर पाए गए वास्तविक खनन के बीच भारी अंतर सामने आया।


यहीं से पूरा मामला सवालों के घेरे में आ गया।


12,293 घनमीटर की अनुमति थी तो 38,700.729 घनमीटर मुरम जमीन से कैसे निकल गई?


और सबसे बड़ा सवाल—


26,407.689 घनमीटर अतिरिक्त मुरम आखिर गई कहां?


प्रशासन के आदेश में अनुमति की आड़ में खनिज के व्यावसायिक दुरुपयोग की बात सामने आई है।




पोकलेन और छह डंपर ने खोला राज


20 फरवरी 2024 को खनिज विभाग की टीम ने रिंगनोदिया में मौके पर जांच की। जांच के दौरान एक एक्सकेवेटर मशीन और छह डंपर मिले, जिन्हें जब्त किया गया।


इसके बाद 23 मार्च 2024 को हल्का पटवारी के साथ मौके और राजस्व अभिलेखों का मिलान किया गया।


जांच में ग्राम रिंगनोदिया स्थित शासकीय भूमि के सर्वे क्रमांक 204, कुल रकबा 1.072 हेक्टेयर, में हुए खनन की मात्रा का आकलन किया गया।


मौके की माप और ई-खनिज पोर्टल पर दर्ज अनुमति के आंकड़ों के बीच बड़ा अंतर सामने आया।




एडीएम रिकेश वैश्य का बड़ा आदेश


प्रकरण में एडीएम रिकेश वैश्य ने 6 मार्च 2026 को आदेश जारी किया।


प्रशासन ने अतिरिक्त खनन को अवैध मानते हुए मेसर्स आकाश इंटरप्राइजेस सहित आठ अनावेदकों पर 7,92,25,100 रुपये का संयुक्त अर्थदंड लगाया।


राशि जमा नहीं करने पर इसकी वसूली भू-राजस्व के बकाया की तरह किए जाने का प्रावधान आदेश में रखा गया है।


यानी कार्रवाई केवल मशीन और वाहन जब्ती तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रशासन ने सीधे करोड़ों रुपये की आर्थिक चोट पहुंचाई।




‘हमारे पास वैध अनुमति थी’—दलील भी नहीं चली


अनावेदकों की ओर से वैध अनुमति होने का तर्क दिया गया। ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के 2 मई 2024 के पत्र का भी हवाला दिया गया।


लेकिन प्रशासन ने ई-खनिज पोर्टल पर दर्ज स्वीकृत मात्रा को महत्वपूर्ण माना।


प्रशासन के अनुसार अनुमति केवल उतनी ही मात्रा तक वैध थी, जितनी पोर्टल पर स्वीकृत थी। स्वीकृत मात्रा से अधिक खनिज निकालने को वैध नहीं माना जा सकता।




खनन का पूरा गणित


शासकीय भूमि: सर्वे क्रमांक 204

भूमि का रकबा: 1.072 हेक्टेयर

वैध अनुमति: 12,293.04 घनमीटर

मौके पर खनन: 38,700.729 घनमीटर

अतिरिक्त खनन: 26,407.689 घनमीटर

जब्त मशीन: 1 एक्सकेवेटर

जब्त डंपर: 6

प्रस्तावित शास्ति: करीब 3.96 करोड़ रुपये

अंतिम संयुक्त अर्थदंड: 7,92,25,100 रुपये




3.96 करोड़ की शास्ति से 7.92 करोड़ तक पहुंचा मामला


प्रकरण में प्रस्तावित शास्ति करीब 3.96 करोड़ रुपये बताई गई थी। अवैध खनन प्रमाणित पाए जाने और प्रकरण में प्रशमन नहीं होने के बाद नियमों के तहत शास्ति की दोगुनी राशि अधिरोपित की गई।


इसके बाद अंतिम संयुक्त अर्थदंड 7.92 करोड़ रुपये निर्धारित हुआ।




सुपुर्दगी पर छोड़ा वाहन भी फिर कार्रवाई के घेरे में


प्रकरण के दौरान जब्त किए गए वाहनों में से एक वाहन को तीन लाख रुपये की सुपुर्दगी राशि जमा कराने के बाद सुपुर्दगी पर दिया गया था।


रिकॉर्ड में वाहन क्रमांक एमपी 09 एचएच 1959 का उल्लेख है।


अब एडीएम रिकेश वैश्य के आदेश में नियम 21 के तहत दी गई वाहन सुपुर्दगी को भी निरस्त कर दिया गया है।




जिन पर लगा संयुक्त अर्थदंड


प्रशासनिक आदेश में निम्न अनावेदकों के नाम दर्ज बताए गए हैं—



मेसर्स आकाश इंटरप्राइजेस — प्रोपराइटर आकाश चौहान


महेश बाबेरिया — वाहन चालक


अजय चौहान — वाहन चालक


हृदा देवरून चौहान — वाहन मालिक


अभिषेक चौहान — वाहन मालिक


शुभम चौहान — वाहन मालिक


सुदेश कुमार जाटव — वाहन चालक


ऋगभ अहिरवार — वाहन चालक






इतने बड़े खनन की भनक पहले क्यों नहीं लगी?


यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती का संदेश जरूर देती है, लेकिन साथ ही स्थानीय निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े करती है।


1.072 हेक्टेयर शासकीय जमीन पर पोकलेन और छह डंपर चल रहे थे तो निगरानी तंत्र को इसकी जानकारी कब हुई?


12,293 घनमीटर की अनुमति 38,700 घनमीटर से अधिक खनन तक कैसे पहुंच गई?


26,407.689 घनमीटर अतिरिक्त मुरम का परिवहन किसने किया?


यदि मुरम सड़क निर्माण के लिए थी तो निर्धारित सड़क निर्माण में वास्तविक उपयोग कितना हुआ?


अतिरिक्त खनिज के परिवहन के दौरान संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था क्या कर रही थी?




कार्रवाई की समयरेखा


20 फरवरी 2024 — खनिज विभाग की मौके पर जांच; एक एक्सकेवेटर और छह डंपर जब्त।


23 मार्च 2024 — हल्का पटवारी के साथ मौके और राजस्व रिकॉर्ड का परीक्षण।


2 मई 2024 — ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण के पत्र का बचाव में हवाला।


7 अप्रैल 2025 — वाहन सुपुर्दगी के लिए तीन लाख रुपये जमा।


11 अप्रैल 2025 — वाहन सुपुर्दगी का आदेश।


6 मार्च 2026 — एडीएम रिकेश वैश्य ने अवैध खनन के मामले में 7.92 करोड़ रुपये का संयुक्त अर्थदंड लगाया और वाहन सुपुर्दगी निरस्त की।




अब सवाल कार्रवाई से आगे का है


रिंगनोदिया प्रकरण में प्रशासन ने अर्थदंड लगाकर कार्रवाई तो कर दी, लेकिन असली सवाल अब भी बरकरार है—


सरकारी जमीन से निकली 26,407.689 घनमीटर अतिरिक्त मुरम का वास्तविक उपयोग कहां हुआ?


यदि यह खनिज सड़क निर्माण में इस्तेमाल नहीं हुआ तो इसका परिवहन कहां किया गया?


किसने इसे खरीदा या इस्तेमाल किया?


क्या इसके परिवहन से जुड़े सभी वाहनों और अभिलेखों की जांच हुई?


और सबसे महत्वपूर्ण—


इतनी बड़ी मात्रा में अतिरिक्त खनन होते रहने के दौरान स्थानीय निगरानी तंत्र की भूमिका क्या रही?


रिंगनोदिया का यह मामला केवल एक खनन प्रकरण नहीं, बल्कि सरकारी खनिज संपदा की निगरानी, अनुमति व्यवस्था और अवैध खनन पर प्रशासनिक नियंत्रण की परीक्षा भी है।


एडीएम रिकेश वैश्य की 7.92 करोड़ रुपये की कार्रवाई ने खनन कारोबार से जुड़े लोगों को स्पष्ट संदेश दिया है—अनुमति की आड़ में स्वीकृत सीमा से बाहर खनिज निकाला गया तो मामला केवल मशीन जब्ती तक नहीं रहेगा, करोड़ों रुपये का अर्थदंड भी भुगतना पड़ सकता है।

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