सीआईडी की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप, काली सूची में डाली गई कंपनी को परीक्षा का काम देने का आरोप
रांची। बौद्धिक प्रतिकार
झारखंड लोक सेवा आयोग की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गई है। झारखंड पुलिस के अपराध अनुसंधान विभाग ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई उस जांच के बाद हुई है, जिसमें उनसे कई दौर में लंबी पूछताछ की गई और उनके आवास सहित आयोग से जुड़े कई ठिकानों पर तलाशी ली गई थी।
काली सूची वाली कंपनी को काम देने का आरोप
जांच का एक प्रमुख बिंदु परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी कंपनी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड को काम सौंपने का मामला है। आरोप है कि कंपनी को काली सूची में डाले जाने के बावजूद परीक्षा संबंधी जिम्मेदारी दी गई और इसके लिए सामान्य निविदा प्रक्रिया के बजाय नामांकन का रास्ता अपनाया गया। सीआईडी इसी निर्णय और इसमें शामिल अधिकारियों की भूमिका की जांच कर रही है।
चार दौर में करीब 30 घंटे पूछताछ
गिरफ्तारी से पहले सीआईडी ने खियांग्ते से अलग-अलग दौर में करीब 30 घंटे पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया, निजी एजेंसी के चयन और आयोग के भीतर लिए गए प्रशासनिक फैसलों से जुड़े सवाल पूछे। जुलाई के अंत में एक दौर की पूछताछ करीब आठ घंटे चली थी।
घर और आयोग के ठिकानों पर छापे
21 जुलाई को सीआईडी और रांची पुलिस ने जेपीएससी कार्यालय तथा परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी के ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इसके बाद 23 जुलाई को खियांग्ते के रांची स्थित आवास पर भी तलाशी ली गई। जांच में दस्तावेजों के साथ कंप्यूटर, हार्ड डिस्क, पेन ड्राइव और अन्य डिजिटल सामग्री खंगाली गई।
इसी घटनाक्रम के बीच खियांग्ते ने जेपीएससी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में उन्हें पूछताछ के लिए सीआईडी के सामने उपस्थित होने के लिए बुलाया गया।
कई गिरफ्तारियां पहले ही हो चुकी थीं
मामले में खियांग्ते से पहले जेपीएससी की परीक्षा उप नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, परीक्षा संचालन से जुड़ी कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह तथा कंपनी से जुड़े अन्य लोगों सहित कई आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी थी। सभी पर परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से जुड़े आरोपों की जांच चल रही है।
पासपोर्ट भी जब्त किया गया था
जांच के दौरान खियांग्ते का पासपोर्ट भी जब्त किए जाने की खबर सामने आई थी। सीआईडी ने उनकी विदेश यात्रा और उससे जुड़े खर्च का विवरण भी मांगा था। इससे संकेत मिला था कि जांच एजेंसी केवल परीक्षा संचालन तक सीमित नहीं रहकर उनसे जुड़े अन्य पहलुओं की भी पड़ताल कर रही है।
परीक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
14वीं जेपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम सामने आने के बाद अभ्यर्थियों और विभिन्न संगठनों ने परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितता, पारदर्शिता की कमी और प्रक्रियागत गड़बड़ियों के आरोप लगाए थे। इसके बाद राज्य सरकार ने जांच सीआईडी को सौंप दी।
जांच आगे बढ़ने के साथ अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि परीक्षा संचालन के लिए निजी एजेंसी के चयन से लेकर प्रश्नपत्र, उत्तरपुस्तिकाओं, आंकड़ों और परिणाम तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया में किस स्तर पर लापरवाही या कथित मिलीभगत हुई?
खियांग्ते की गिरफ्तारी से जांच को नया मोड़ मिला है। अब सीआईडी यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी केवल निचले स्तर के कर्मचारियों और निजी एजेंसी तक सीमित थी या निर्णय लेने वाले उच्च स्तर के अधिकारियों की भूमिका भी सामने आती है।
महत्वपूर्ण: खियांग्ते और अन्य आरोपियों पर लगे आरोप अभी जांच का विषय हैं। गिरफ्तारी अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है; अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।

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