भारत-कनाडा आर्थिक संवाद: व्यापार से आगे बढ़ी साझेदारी, निवेश-यूपीआई से खनिज तक बनी सहमति

नई दिल्ली। भारत और कनाडा के रिश्तों में आर्थिक मोर्चे पर नई शुरुआत होती दिख रही है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और कनाडा के वित्त मंत्री फ्रांस्वा-फिलिप शांपेन के बीच पहली आर्थिक एवं वित्तीय वार्ता में दोनों देशों ने व्यापार बढ़ाने के साथ निवेश, वित्तीय क्षेत्र, डिजिटल भुगतान और महत्वपूर्ण खनिजों में सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर यानी करीब ₹4.65 लाख करोड़ तक पहुंचाने की साझा महत्वाकांक्षा दोहराई। 



सबसे अहम मुद्दों में द्विपक्षीय निवेश संधि शामिल रही। भारत ने जल्द से जल्द इस पर बातचीत शुरू करने की तैयारी जताई है। यह समझौता दोनों देशों के निवेशकों को अधिक स्पष्टता और सुरक्षा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 


बातचीत सिर्फ पारंपरिक व्यापार तक सीमित नहीं रही। दोनों पक्षों ने भारत के यूपीआई और कनाडा की भुगतान व्यवस्था के बीच संभावित सहयोग, डिजिटल वित्तीय ढांचे, बैंकिंग और वित्तीय प्रौद्योगिकी क्षेत्र में साझेदारी पर भी चर्चा की। इससे दोनों देशों के बीच व्यापार, पर्यटन, विद्यार्थियों और छोटे कारोबारों के लिए सीमा-पार भुगतान आसान और कम खर्चीला बनाने की संभावना है। 


इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज, ऊर्जा, पूंजी बाजार और कनाडाई संस्थागत निवेश भी एजेंडे में रहे। सीतारमण ने कनाडाई निवेशकों को भारत की आर्थिक वृद्धि, बढ़ते बाजार और गिफ्ट सिटी में निवेश के अवसरों की ओर आकर्षित किया। 


यह बदलाव इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत-कनाडा संबंधों में हाल के वर्षों की कूटनीतिक खटास के बाद अब दोनों देश व्यापार से आगे दीर्घकालीन आर्थिक साझेदारी की जमीन तैयार कर रहे हैं।

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