नई दिल्ली। शेयर बाजार में कभी भरोसे का दूसरा नाम माने जाने वाले एचडीएफसी समूह के लिए पिछला एक साल बेहद चुनौतीपूर्ण रहा है। समूह की चार सूचीबद्ध कंपनियों के बाजार पूंजीकरण में करीब ₹4.38 लाख करोड़ की कमी आई है। इसमें सबसे बड़ा नुकसान एचडीएफसी बैंक का रहा, जिसकी बाजार पूंजी लगभग ₹15 लाख करोड़ से घटकर करीब ₹11 लाख करोड़ रह गई। बैंक के शेयर में करीब 26 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
अब अमेरिकी अदालत में दायर प्रतिभूति संबंधी सामूहिक मुकदमे ने निवेशकों की चिंता और बढ़ा दी है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम से जुड़े करीब ₹45 करोड़ के भुगतान से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी निवेशकों से छिपाई और भुगतान को विपणन खर्च के रूप में दर्ज किया गया। यह मामला न्यूयॉर्क की संघीय अदालत में दायर हुआ है। बैंक ने इन आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वह मामले का मजबूती से बचाव करेगा।
27 अगस्त को एचडीएफसी बैंक का शेयर करीब 2.37 प्रतिशत गिरकर ढाई साल के निचले स्तर पर पहुंच गया। रॉयटर्स के अनुसार 2026 में अब तक शेयर करीब 25 प्रतिशत नीचे है। बैंक के नेतृत्व परिवर्तन को लेकर अनिश्चितता और अक्टूबर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी शशिधर जगदीशन का कार्यकाल समाप्त होना भी निवेशकों की चिंता बढ़ा रहा है।
हालांकि, अमेरिकी मुकदमा अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं है। आगे अदालत की कार्रवाई और बैंक की कानूनी प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल बड़ा सवाल यही है—क्या एचडीएफसी समूह इस भरोसे के संकट से जल्दी बाहर निकल पाएगा, या शेयरों पर दबाव अभी और जारी रहेगा?

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