इंदौर। शहर की सड़कों पर लगातार बढ़ते ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या से निपटने के लिए प्रशासन, नगर निगम और पुलिस ने संयुक्त मोर्चा खोल दिया है। शनिवार को रेसिडेंसी कोठी में महापौर पुष्यमित्र भार्गव की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में इंदौर के ट्रैफिक को पटरी पर लाने के लिए तीन चरणों में बड़ा कार्ययोजना तैयार की गई।
पहले चरण में जाम के प्रमुख कारणों पर सीधा प्रहार होगा। सड़क की गलत ज्योमेट्री और बॉटलनेक सुधारे जाएंगे। प्रमुख चौराहों के साथ बाकी महत्वपूर्ण लेफ्ट टर्न भी चौड़े किए जाएंगे। चार प्रमुख मार्गों को अतिक्रमण मुक्त करने की कार्रवाई होगी। मुख्य सड़कों और व्यावसायिक क्षेत्रों में सड़क किनारे पार्किंग पर नियंत्रण किया जाएगा। आवारा मवेशियों और अतिक्रमण के खिलाफ भी सख्त अभियान चलाया जाएगा।
स्कूल-कॉलेजों में ट्रैफिक नियमों के प्रति जागरूकता अभियान चलाने की योजना है। सीसीटीवी के जरिए ई-चालान और मोबाइल कोर्ट की कार्रवाई तेज होगी। पीक आवर्स में जाम रोकने के लिए माल ढुलाई और लोडिंग-अनलोडिंग को रात के समय कराने की व्यवस्था पर भी काम किया जाएगा।
दूसरे और तीसरे चरण में शहर के सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करने पर जोर रहेगा। मेट्रो, सिटी बस और उपनगरीय रेल को एकीकृत परिवहन नेटवर्क से जोड़ने की योजना है। शहर में वाहनों की औसत गति बढ़ाने के लिए फ्लाईओवर निर्माण, बसों की संख्या बढ़ाने और बाहरी बस अड्डों की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।
थोक मंडियों और लोडिंग-अनलोडिंग क्षेत्रों को शहर से बाहर स्थानांतरित करने पर भी विचार किया गया है। गंगवाल, सरवटे, नायता मुंडला और कुमेड़ी बस टर्मिनलों के बीच बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने की योजना है।
बैठक में ट्रैफिक पुलिस बल को लगभग 1500 से बढ़ाकर 3000 तक करने, ई-चालान को अधिक प्रभावी डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ने तथा साइकिल ट्रैक और पैदल यात्रियों के लिए विशेष मार्ग विकसित करने जैसे लक्ष्य भी तय किए गए।
इंदौर के सामने अब चुनौती सिर्फ जाम हटाने की नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ते शहर के लिए भविष्य का ट्रैफिक ढांचा तैयार करने की है। सवाल यह है कि यह बड़ा एक्शन प्लान जमीन पर कितनी तेजी से उतरता है।

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