महाराष्ट्र की राजनीति में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा किसी बयान की नहीं, बल्कि मुलाकातों और बदलते संकेतों की है। शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के सांसदों की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लगातार मुलाकातों ने राजनीतिक अटकलों को हवा दे दी है। 10 अगस्त को सुप्रिया सुले के नेतृत्व में पार्टी के सभी आठ लोकसभा सांसदों ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की। पार्टी सूत्रों के मुताबिक यह करीब 25 दिनों में प्रधानमंत्री के साथ चौथी मुलाकात थी।
इसके बाद सवाल उठने लगा कि क्या यह केवल संसदीय मुद्दों पर बातचीत है या महाराष्ट्र के लिए कोई बड़ा राजनीतिक संदेश भी छिपा है। खासकर तब, जब शरद पवार गुट की अगली रणनीति को लेकर खुद रोहित पवार ने भी अनिश्चितता जताई है। उन्होंने कहा है कि पार्टी का अगला कदम देखने के बाद ही तस्वीर साफ होगी।
दूसरी ओर भाजपा नेतृत्व भी फिलहाल बेहद सावधानी से कदम बढ़ाता दिखाई दे रहा है। जुलाई में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कहा था कि फिलहाल कोई नई पार्टी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन या महायुति में शामिल नहीं हो रही।
यानी मुलाकातें हो रही हैं, बातचीत बढ़ रही है और अटकलें भी तेज हैं—लेकिन भाजपा और शरद पवार गुट के बीच किसी गठबंधन या विलय की आधिकारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।
फिर भी महाराष्ट्र की राजनीति में पवार की चाल को कभी हल्के में नहीं लिया जाता। सवाल यही है—ये सिर्फ दिल्ली की मुलाकातें हैं या 2027 से पहले महाराष्ट्र की राजनीति का अगला बड़ा अध्याय लिखा जा रहा है?

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