नई दिल्ली। आईआईटी दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी भौतिकी छात्र ऋषिकेश कुमार की मौत के मामले की जांच के लिए संस्थान ने बाहरी जांच समिति का पुनर्गठन किया है। अब दिल्ली हाईकोर्ट की सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता समिति की अध्यक्षता करेंगी। यह बदलाव छात्रों के लगातार विरोध और स्वतंत्र जांच की मांग के बीच किया गया है।
ऋषिकेश कुमार की 22 अगस्त को आईआईटी दिल्ली परिसर की व्याख्यान भवन की छठी मंजिल से गिरने के बाद मौत हो गई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और इस संबंध में अज्ञात लोगों के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला भी दर्ज किया गया है।
शुरुआत में जांच समिति की अध्यक्षता उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक और आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र अशोक कुमार को दी गई थी। उन्होंने निजी व्यस्तताओं का हवाला देते हुए समिति से अलग होने का निर्णय लिया। इसके बाद संस्थान ने नई अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता की नियुक्ति की।
नई समिति में एम्स नई दिल्ली के मनोचिकित्सा विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रताप शरण, चार छात्र प्रतिनिधि और आईआईटी दिल्ली के रजिस्ट्रार शामिल हैं। समिति छात्रों, शिक्षकों और प्रशासनिक अधिकारियों से बातचीत करेगी, संस्थान की मौजूदा व्यवस्थाओं और प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी तथा सुधार के सुझाव देगी। उसे दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने को कहा गया है।
छात्र लंबे समय से ऐसी समिति की मांग कर रहे थे जिसकी अध्यक्षता सेवानिवृत्त सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीश करें। अब न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता को अध्यक्ष बनाए जाने से जांच की निष्पक्षता को लेकर छात्रों की प्रमुख मांग पूरी हुई है।
मामले में अब निगाह इस बात पर रहेगी कि समिति ऋषिकेश की मौत से जुड़े घटनाक्रम, संस्थागत प्रक्रियाओं और छात्रों द्वारा उठाए गए सवालों पर अपनी रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष देती है।

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