लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने प्रदेश में अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने की तैयारी तेज कर दी है। पार्टी के प्रदेश प्रभारी और जमुई से सांसद अरुण भारती के मुताबिक सितंबर 2026 से जनवरी 2027 तक उत्तर प्रदेश में लगातार संगठनात्मक और जनसंपर्क कार्यक्रम चलाए जाएंगे। अभियान की शुरुआत प्रयागराज से चिराग पासवान करेंगे।
पार्टी ने सामाजिक समीकरण साधने के लिए ‘पंडित-पासी-पासवान’ यानी पी-3 फार्मूले को आगे बढ़ाने की रणनीति बनाई है। इसके साथ ही दलित चौपाल और चाणक्य चौपाल जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। पार्टी का दावा है कि इन कार्यक्रमों के जरिए अलग-अलग सामाजिक वर्गों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया जाएगा।
चिराग पासवान की रणनीति केवल जातीय समीकरण तक सीमित नहीं रहने वाली है। पार्टी युवाओं, बेरोजगारी और जेन-जी से जुड़े मुद्दों को भी अपने अभियान में प्रमुखता देने की तैयारी कर रही है। प्रयागराज में छात्रों और युवाओं के साथ संवाद कार्यक्रम भी प्रस्तावित है।
एलजेपी रामविलास उत्तर प्रदेश के लिए बिहार की तर्ज पर विजन दस्तावेज तैयार करने की भी बात कह रही है। इसमें सड़क, बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी मुद्दों को शामिल करने की योजना है। पार्टी इससे पहले प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी की बात भी कह चुकी है, हालांकि कितनी सीटों पर वास्तव में चुनाव लड़ा जाएगा, यह आगे तय होना है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि चिराग का यह सामाजिक समीकरण उत्तर प्रदेश में कितना असर पैदा करता है। भाजपा, सपा, कांग्रेस और बसपा जैसे स्थापित दलों के बीच एलजेपी रामविलास को अपनी अलग राजनीतिक पहचान बनाने के लिए मजबूत संगठन और स्थानीय नेतृत्व की जरूरत होगी।
सितंबर से प्रयागराज की धरती पर शुरू होने वाला यह अभियान चिराग पासवान के लिए केवल चुनावी दौरा नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश में पार्टी की वास्तविक ताकत परखने की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है।

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