नई दिल्ली। कैंसर के इलाज के दौरान कई मरीजों को बाल झड़ने की समस्या का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति सबसे अधिक कीमोथेरेपी के दौरान देखने को मिलती है। हालांकि, हर कैंसर मरीज के बाल नहीं झड़ते और यह इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं तथा उपचार की प्रकृति पर निर्भर करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, कीमोथेरेपी की दवाएं शरीर में तेजी से बढ़ने वाली कोशिकाओं को नष्ट करती हैं। कैंसर कोशिकाओं के साथ-साथ बालों की जड़ों की कोशिकाएं भी बहुत तेजी से विभाजित होती हैं। इसी कारण दवाओं का असर बालों की जड़ों पर भी पड़ता है और कुछ दिनों या हफ्तों के भीतर बाल झड़ने लगते हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि यह बाल झड़ना अस्थायी होता है। अधिकांश मरीजों में कीमोथेरेपी पूरी होने के कुछ सप्ताह या महीनों बाद नए बाल उगने लगते हैं। शुरुआत में नए बालों का रंग या बनावट पहले से अलग हो सकती है, लेकिन समय के साथ सामान्य हो जाती है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इलाज के दौरान सिर की त्वचा की देखभाल करें, हल्के शैंपू का उपयोग करें, धूप से बचाव करें और यदि जरूरत महसूस हो तो स्कार्फ, टोपी या विग का इस्तेमाल किया जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बाल झड़ना इलाज के प्रभाव का संकेत हो सकता है, इसलिए घबराने के बजाय अपने ऑन्कोलॉजिस्ट की सलाह का पालन करना चाहिए।
डॉक्टर यह भी बताते हैं कि आधुनिक उपचार पद्धतियों में कुछ मामलों में स्कैल्प कूलिंग जैसी तकनीकों का उपयोग कर बाल झड़ने की संभावना कम करने का प्रयास किया जाता है, हालांकि यह सभी मरीजों के लिए उपयुक्त नहीं होती।

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