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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावी तैयारियों के बीच समाजवादी पार्टी (सपा) ने अब पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) रणनीति के साथ ब्राह्मण समाज को भी साधने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी जनेश्वर मिश्र की जयंती पर बड़े सम्मेलन का आयोजन कर रही है, जिसे नए सामाजिक समीकरण बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सपा अपने पारंपरिक वोट बैंक को मजबूत बनाए रखने के साथ उन वर्गों तक भी पहुंच बनाना चाहती है, जो पिछले कुछ चुनावों में भाजपा के साथ जुड़े रहे हैं। इसी रणनीति के तहत ब्राह्मण समाज के बीच संवाद बढ़ाने और राजनीतिक संदेश देने की तैयारी की गई है।
पार्टी का दावा है कि सम्मेलन के जरिए सामाजिक न्याय, संविधान और सभी वर्गों की भागीदारी का संदेश दिया जाएगा। वहीं भाजपा इसे चुनावी राजनीति का हिस्सा बताते हुए कह रही है कि ब्राह्मण समाज का विश्वास उसके साथ बना हुआ है।
अब राजनीतिक नजरें इस सम्मेलन पर टिकी हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आयोजन में कितनी भागीदारी होती है और क्या सपा ब्राह्मण समाज तक वह राजनीतिक संदेश पहुंचाने में सफल रहती है, जिसकी उसे उम्मीद है। सम्मेलन की सफलता या विफलता आगामी चुनावी रणनीति पर भी असर डाल सकती है।

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