क्या सच में शेषनाग के फन पर टिकी है धरती? पुराणों में क्या लिखा है

नई दिल्ली। नाग पंचमी के अवसर पर शेषनाग का स्मरण हिंदू धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व रखता है। लोकमान्यताओं में कहा जाता है कि पृथ्वी शेषनाग के फन पर टिकी है और उनके कारण धरती स्थिर है। लेकिन क्या यह बात सचमुच पुराणों में इसी रूप में लिखी गई है? इसका जवाब समझने के लिए धार्मिक मान्यता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को अलग-अलग देखना जरूरी है।



कौन हैं शेषनाग?


हिंदू पुराणों और धार्मिक कथाओं में शेषनाग को अनंत भी कहा गया है। उन्हें भगवान विष्णु की शय्या के रूप में वर्णित किया जाता है। क्षीरसागर में भगवान विष्णु का शेषनाग पर विश्राम करना हिंदू धार्मिक चित्रण का प्रमुख हिस्सा है।


कुछ पुराणिक कथाओं में शेषनाग को पृथ्वी को धारण करने वाला बताया गया है। इसी वजह से कालांतर में यह धारणा लोकप्रिय हुई कि धरती शेषनाग के फनों पर टिकी हुई है।


क्या शेषनाग को विष्णु का अवतार कहा गया है?


धार्मिक ग्रंथों में शेषनाग का संबंध भगवान विष्णु से अत्यंत निकट माना गया है। हालांकि अलग-अलग पुराणों और परंपराओं में उनके स्वरूप और भूमिका के वर्णन में अंतर मिलता है। इसलिए उन्हें सीधे ‘भगवान विष्णु का तामसी अवतार’ कहना सभी परंपराओं में समान रूप से स्वीकार्य नहीं है।


वैष्णव परंपरा में शेषनाग को भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप और दिव्य सेवक के रूप में विशेष स्थान प्राप्त है।


फिर पृथ्वी को धारण करने की बात कहां से आई?


पुराणिक साहित्य में ब्रह्मांड, लोकों और पृथ्वी की संरचना को समझाने के लिए प्रतीकात्मक और धार्मिक आख्यान मिलते हैं। शेषनाग का पृथ्वी को धारण करना भी इसी धार्मिक ब्रह्मांड-दृष्टि का हिस्सा माना जाता है।


यहां ‘धारण’ का अर्थ केवल भौतिक रूप से किसी वस्तु को उठाकर रखने से जोड़ना जरूरी नहीं है। धार्मिक प्रतीकों में शेषनाग अनंतता, स्थिरता और ब्रह्मांडीय व्यवस्था के प्रतीक के रूप में भी देखे जाते हैं।


विज्ञान क्या कहता है?


आधुनिक विज्ञान के अनुसार पृथ्वी किसी सर्प या जीव के फन पर नहीं टिकी है। पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती है और अपनी धुरी पर घूमती है। गुरुत्वाकर्षण तथा अन्य भौतिक नियम पृथ्वी और सौरमंडल की गति एवं संरचना को समझाते हैं।


इसलिए शेषनाग की कथा को धार्मिक-पौराणिक मान्यता के रूप में समझना उचित है, जबकि पृथ्वी की वास्तविक भौतिक संरचना और गति की व्याख्या विज्ञान करता है।


नाग पंचमी पर क्यों होता है शेषनाग का स्मरण?


नाग पंचमी भारतीय धार्मिक परंपरा में नागों के प्रति सम्मान और प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व का संदेश देने वाला पर्व भी माना जाता है। शेषनाग का स्मरण इस व्यापक नाग-परंपरा से जुड़ता है।


निष्कर्ष: शेषनाग के फन पर पृथ्वी के टिके होने की बात वैज्ञानिक तथ्य नहीं, बल्कि पुराणिक और धार्मिक मान्यता है। इसे भारतीय धार्मिक कल्पना, प्रतीक और ब्रह्मांड-दृष्टि के संदर्भ में समझना अधिक उचित है।

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