नई दिल्ली। भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग पिछले 11 वर्षों में आयात-निर्भर बाजार से वैश्विक विनिर्माण और निर्यात के बड़े केंद्र के रूप में तेजी से उभरा है। वित्त वर्ष 2025-26 में देश का इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात बढ़कर 4.24 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो 2014-15 के 38,263 करोड़ रुपये के मुकाबले करीब 11 गुना है। इलेक्ट्रॉनिक्स अब भारत की तीसरी सबसे बड़ी निर्यात श्रेणी बन चुका है।
मोबाइल फोन ने बदली तस्वीर
इस बदलाव की सबसे बड़ी कहानी मोबाइल फोन निर्माण की है। 2014-15 में भारत में मोबाइल फोन का उत्पादन करीब 18,900 करोड़ रुपये था, जो 2025-26 में बढ़कर 6.27 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी उत्पादन में करीब 33 गुना की वृद्धि हुई।
मोबाइल फोन का निर्यात तो इससे भी तेज रफ्तार से बढ़ा। 2014-15 में महज 1,566 करोड़ रुपये के मोबाइल निर्यात के मुकाबले 2025-26 में यह आंकड़ा करीब 2.60 लाख करोड़ रुपये हो गया—लगभग 165 गुना वृद्धि।
दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता
भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन चुका है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार देश में मोबाइल फोन बनाने वाली इकाइयों की संख्या भी पिछले दशक में तेजी से बढ़ी है। उत्पादन बढ़ने के साथ घरेलू आपूर्ति शृंखला और रोजगार के अवसर भी बढ़े हैं।
2025 में स्मार्टफोन भारत की सबसे बड़ी निर्यात वस्तु बनकर सामने आया। यह बदलाव खास महत्व रखता है, क्योंकि 2014-15 में मोबाइल फोन निर्यात की सूची में 153वें स्थान पर था।
उत्पादन 13 लाख करोड़ के पार
इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र का कुल उत्पादन भी 2014-15 के करीब 1.90 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में अनुमानित 13.11 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। यानी उत्पादन करीब सात गुना बढ़ा है। साथ ही घरेलू मूल्यवर्धन भी बढ़कर लगभग 23 प्रतिशत तक पहुंचने की बात सरकार ने कही है।
रोजगार का भी बड़ा आधार
इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण अब केवल निर्यात का माध्यम नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार देने वाला क्षेत्र भी बन रहा है। सरकार के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण में करीब 25 लाख रोजगार पैदा हुए हैं। इनमें मोबाइल विनिर्माण क्षेत्र में लगभग 12 लाख प्रत्यक्ष रोजगार हैं और महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत बताई गई है।
असली चुनौती—क्या भारत केवल असेंबली हब रहेगा?
आंकड़े निश्चित रूप से भारत की बड़ी छलांग दिखाते हैं, लेकिन अगली चुनौती और कठिन है। इलेक्ट्रॉनिक्स में निर्यात बढ़ने के साथ घरेलू घटक निर्माण, चिप, डिस्प्ले, बैटरी और अन्य महत्वपूर्ण हिस्सों का उत्पादन भी बढ़ाना होगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स में घरेलू मूल्यवर्धन अभी भी पूरी आपूर्ति शृंखला की तुलना में सीमित है।
इसलिए अगला लक्ष्य केवल “भारत में बना मोबाइल” नहीं, बल्कि उसके अधिकतम हिस्से को भारत में डिजाइन, विकसित और निर्मित करना होना चाहिए।
11 साल का आंकड़ा भारत की क्षमता दिखाता है; अगली परीक्षा यह तय करेगी कि भारत दुनिया के लिए सिर्फ इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाला देश बनता है या इलेक्ट्रॉनिक्स की पूरी वैश्विक आपूर्ति शृंखला का केंद्र।

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