नई दिल्ली। उम्र बढ़ने के साथ थकान, कमजोरी, पैरों में सूजन या रात में बार-बार पेशाब आने जैसी परेशानियां आम लग सकती हैं। लेकिन कई बार यही बदलाव किडनी की कार्यक्षमता कमजोर होने के संकेत भी हो सकते हैं। खास बात यह है कि शुरुआती किडनी रोग में कई लोगों को स्पष्ट लक्षण दिखाई ही नहीं देते, इसलिए जोखिम वाले लोगों में नियमित जांच महत्वपूर्ण है।
किडनी की समस्या बढ़ने पर पैरों, टखनों या आंखों के आसपास सूजन, पेशाब की मात्रा में बदलाव, पेशाब में झाग या खून, भूख कम लगना, मतली, खुजली और लगातार थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों को रात में सामान्य से ज्यादा बार पेशाब की जरूरत महसूस हो सकती है।
कमर या शरीर के किनारे दर्द भी किडनी से जुड़ी समस्या में हो सकता है, हालांकि इसके कई दूसरे कारण भी होते हैं। सांस फूलना या अत्यधिक कमजोरी जैसी शिकायतें गंभीर स्थिति का संकेत हो सकती हैं और इन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग, मोटापा या परिवार में किडनी रोग का इतिहास रखने वाले लोगों में जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को चिकित्सकीय सलाह के अनुसार रक्तचाप, रक्त में क्रिएटिनिन और पेशाब की जांच कराते रहना चाहिए।
सबसे जरूरी बात यह है कि हर थकान या सूजन को उम्र का सामान्य हिस्सा मानना सही नहीं है। लक्षण लगातार बने रहें, तेजी से बढ़ें या पेशाब में खून दिखाई दे तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करें। समय पर पहचान से किडनी की कार्यक्षमता को और खराब होने से रोकने में मदद मिल सकती है।

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