हार्ट अटैक के बाद मरीज की बंद या संकरी हो चुकी हृदय धमनी को खोलने के लिए स्टेंट लगाया जाता है। इससे रक्त प्रवाह सामान्य करने में मदद मिलती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि भविष्य में हार्ट अटैक की संभावना पूरी तरह खत्म हो जाती है।
हृदय रोग विशेषज्ञों के अनुसार स्टेंट केवल प्रभावित धमनी को खोलता है। यदि शरीर की दूसरी धमनियों में वसा जमना जारी रहता है, या मरीज दवाएं समय पर नहीं लेता, धूम्रपान करता है, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल पर नियंत्रण नहीं रखता, तो दोबारा हार्ट अटैक का खतरा बना रह सकता है।
डॉक्टर बताते हैं कि स्टेंट लगने के बाद रक्त को पतला रखने वाली दवाएं, कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित करने की दवाएं और नियमित चिकित्सकीय जांच बेहद जरूरी होती है। बिना सलाह के दवाएं बंद करना स्टेंट में रक्त का थक्का बनने का खतरा बढ़ा सकता है, जो गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, वजन नियंत्रित रखना, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी, तनाव कम करना तथा मधुमेह और रक्तचाप को नियंत्रित रखना दोबारा हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम कर सकता है।
चिकित्सकों का स्पष्ट मत है कि स्टेंट इलाज का महत्वपूर्ण हिस्सा है, लेकिन दीर्घकालिक सुरक्षा मरीज की जीवनशैली, नियमित दवा और समय-समय पर चिकित्सकीय निगरानी पर निर्भर करती है।

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