भोपाल। मध्य प्रदेश में खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए बनाए गए जिला खनिज प्रतिष्ठान (डीएमएफ) फंड को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। विधानसभा में पूछे गए प्रश्न के लिखित उत्तर में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले तीन वर्षों में डीएमएफ मद में जमा 346 करोड़ रुपये से अधिक राशि के व्यय का समेकित ब्यौरा राज्य स्तर पर उपलब्ध नहीं है। यह मुद्दा कांग्रेस विधायक एवं पूर्व मंत्री सचिन यादव द्वारा उठाया गया।
क्या है डीएमएफ?
डीएमएफ (जिला खनिज प्रतिष्ठान) का गठन खनन प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास के लिए किया गया था। खनन कंपनियों से वसूली गई निर्धारित राशि इसी कोष में जमा होती है और इसे संबंधित जिलों में विकास कार्यों पर खर्च किया जाना चाहिए।
सरकार के जवाब से उठे सवाल
विधानसभा में पूछा गया कि:
डीएमएफ में कितनी राशि जमा हुई?
यह राशि किन विभागों और योजनाओं पर खर्च हुई?
किन जिलों में कितना व्यय किया गया?
सरकार ने केवल यह बताया कि तीन वर्षों में 346 करोड़ रुपये से अधिक राशि जमा हुई, लेकिन यह नहीं बता सकी कि पैसा कहाँ और किस मद में खर्च हुआ। विभाग ने लिखित उत्तर में कहा कि इस व्यय का समेकित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
किन जिलों में सबसे अधिक राशि जमा हुई?
रिपोर्ट के अनुसार प्रमुख जिलों में डीएमएफ जमा राशि इस प्रकार रही:
सीहोर – लगभग 39.72 करोड़ रुपये
नरसिंहपुर – 26.20 करोड़ रुपये
कटनी – 20.04 करोड़ रुपये
बालाघाट – 19.54 करोड़ रुपये
छतरपुर – 19.49 करोड़ रुपये
सिंगरौली – 17.98 करोड़ रुपये
शहडोल – 16.94 करोड़ रुपये
सीधी – 16.02 करोड़ रुपये
रायसेन – 12.35 करोड़ रुपये
दतिया – 12.05 करोड़ रुपये
प्रमुख सवाल
यदि राशि जिलों को जारी हुई तो उसका उपयोग किस कार्य में हुआ?
खर्च का राज्य स्तर पर रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया?
क्या निगरानी और लेखा परीक्षण की व्यवस्था प्रभावी थी?
क्या भविष्य में इस राशि का सामाजिक या वित्तीय अंकेक्षण कराया जाएगा?
डीएमएफ जैसी योजनाएँ सीधे खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के विकास से जुड़ी हैं। यदि व्यय का समेकित लेखा उपलब्ध नहीं है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है। हालांकि, यह स्पष्ट करना आवश्यक है कि रिकॉर्ड उपलब्ध न होने का अर्थ अपने-आप वित्तीय अनियमितता या घोटाले का प्रमाण नहीं है। इसकी पुष्टि किसी वैधानिक जांच या लेखा परीक्षण के बाद ही हो सकती है।

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