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एक साल में 56 बॉडीबिल्डरों की मौत ने बढ़ाई चिंता, कम उम्र में क्यों थम रही धड़कनें?

 

दुनिया भर में पिछले एक वर्ष के दौरान कई पेशेवर और शौकिया बॉडीबिल्डरों की कम उम्र में मौत ने फिटनेस जगत को झकझोर दिया है। हैरानी की बात यह है कि इनमें अधिकांश एथलीट बाहर से पूरी तरह स्वस्थ और बेहद फिट दिखाई देते थे, लेकिन कई मामलों में अचानक हार्ट अटैक, कार्डियक अरेस्ट या गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं ने उनकी जान ले ली।



चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक मांसपेशियां बनाने की होड़ में कई खिलाड़ी जरूरत से ज्यादा कठोर व्यायाम, अत्यधिक प्रोटीन, डिहाइड्रेशन, शरीर का पानी कम करने वाली दवाओं और प्रतिबंधित प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों का सहारा लेते हैं। इन कारणों से हृदय, किडनी और लीवर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।


विशेषज्ञ बताते हैं कि लंबे समय तक एनाबॉलिक स्टेरॉयड और अन्य प्रदर्शन बढ़ाने वाले पदार्थों का सेवन हृदय की मांसपेशियों को मोटा कर सकता है, रक्तचाप बढ़ा सकता है और अनियमित धड़कनों का खतरा पैदा कर सकता है। कई बार यही स्थिति अचानक कार्डियक अरेस्ट का कारण बन जाती है।


प्रतियोगिताओं से पहले शरीर को बेहद सूखा और उभरा हुआ दिखाने के लिए कुछ खिलाड़ी पानी और नमक का सेवन कम कर देते हैं तथा मूत्रवर्धक दवाओं का उपयोग करते हैं। इससे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बिगड़ सकता है, जो दिल की धड़कन पर गंभीर असर डालता है।


डॉक्टरों का कहना है कि केवल शरीर का आकर्षक दिखना अच्छे स्वास्थ्य की गारंटी नहीं है। नियमित हृदय जांच, रक्तचाप, किडनी और लीवर की जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी प्रदर्शन बढ़ाने वाली दवा से दूरी ही सुरक्षित फिटनेस का आधार है।


विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि सभी बॉडीबिल्डरों की मौत का कारण एक जैसा नहीं होता। कई मामलों में पहले से मौजूद हृदय रोग, आनुवंशिक कारण या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इसलिए किसी एक कारण को सभी मामलों पर लागू नहीं किया जा सकता।

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