भारत में मोटापा अब केवल बड़े शहरों तक सीमित समस्या नहीं रह गया है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6 के 2023-24 के आंकड़े बताते हैं कि 15 से 49 वर्ष की उम्र की 30.7 प्रतिशत महिलाएं और 27.3 प्रतिशत पुरुष ओवरवेट या मोटापे की श्रेणी में हैं। पांच साल पहले की तुलना में दोनों आंकड़ों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
बदलती जीवनशैली, कम शारीरिक गतिविधि और खान-पान में आए बदलाव इस बढ़ती समस्या के पीछे महत्वपूर्ण कारण माने जा रहे हैं। शोध में यह भी सामने आया है कि प्रसंस्कृत और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की आसान उपलब्धता तथा कम कीमत ने लोगों की खाने की आदतों को प्रभावित किया है।
चिंता की बात यह है कि ग्रामीण भारत में भी मोटापे का बढ़ता रुझान दिखाई दे रहा है। हालिया सर्वेक्षण के विश्लेषण में शहरों के साथ गांवों में भी ओवरवेट और मोटापे की दर बढ़ने की बात सामने आई है। यानी अब इसे केवल शहरी जीवनशैली की समस्या मानना सही नहीं होगा।
दूसरी ओर, ग्रामीण बाजार में एफएमसीजी उत्पादों की मांग लगातार मजबूत रही है। नीलसनआईक्यू के अनुसार 2025 की तीसरी तिमाही में ग्रामीण एफएमसीजी बाजार की मात्रा में 7.7 प्रतिशत वृद्धि दर्ज हुई, जो शहरी बाजार की 3.7 प्रतिशत वृद्धि से अधिक थी।
यहां सवाल केवल कंपनियों की बढ़ती बिक्री का नहीं, बल्कि क्या हमारी बढ़ती खाद्य खपत स्वस्थ दिशा में जा रही है? इसका है। पैकेज्ड स्नैक्स, मीठे पेय और अत्यधिक प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की जगह घर का संतुलित भोजन, फल-सब्जियां और नियमित शारीरिक गतिविधि को प्राथमिकता देना जरूरी है।

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