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आतंक की फैक्ट्री पर निर्णायक प्रहार कब?



संपादकीय

प्रणव बजाज


कश्मीर में फिर निर्दोषों का खून बहा। कुलगाम में छत्तीसगढ़ के दो मजदूरों की नाम पूछकर हत्या कोई सामान्य आतंकी घटना नहीं, बल्कि भारत की एकता, सामाजिक सौहार्द और जम्मू-कश्मीर में लौटती सामान्य स्थिति पर सीधा हमला है। यह वही घिनौनी सोच है जिसने पहले पहलगाम में निर्दोष पर्यटकों को निशाना बनाया और अब रोजी-रोटी कमाने आए मजदूरों को।



आतंकियों का मकसद साफ है—डर पैदा करो, विकास रोक दो और समाज में विभाजन की दीवार खड़ी कर दो। टीआरएफ जैसे नए नाम भले सामने आ जाएं, लेकिन दुनिया जानती है कि इनके पीछे वही पुरानी पाकिस्तानी आतंकी फैक्ट्री, वही प्रशिक्षण शिविर, वही हथियार और वही सरपरस्त हैं।


पाकिस्तान हर बार यही पुराना खेल खेलता है। जब उसकी अर्थव्यवस्था चरमराती है, राजनीतिक संकट गहराता है या पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में जनता की आवाज और अंतरराष्ट्रीय सवाल तेज होते हैं, तब सीमा पार से आतंकवाद का बटन दबा दिया जाता है। आतंक उसके लिए केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि विदेश नीति का औजार बन चुका है।


लेकिन अब सवाल केवल पाकिस्तान से नहीं, पूरी दुनिया से भी है। आतंकवाद पर भाषण देने वाले देशों की असली परीक्षा कार्रवाई से होगी। जब तक आतंक के वित्तपोषण, प्रशिक्षण और संरक्षण देने वालों पर कठोर वैश्विक प्रतिबंध नहीं लगेंगे, तब तक निर्दोषों का खून बहता रहेगा।


भारत ने पिछले वर्षों में आतंकवाद के खिलाफ कठोर नीति अपनाई है। सीमा पार जवाबी कार्रवाई, आतंकी ढांचे पर प्रहार और कूटनीतिक दबाव ने पाकिस्तान को असहज किया है। यही वजह है कि वह सीधे युद्ध की जगह कायराना प्रॉक्सी आतंकवाद का सहारा ले रहा है।


सिर्फ आतंकियों को मार देना पर्याप्त नहीं होगा। आतंक पैदा करने वाली पूरी व्यवस्था को ध्वस्त करना होगा। सीमा सुरक्षा को और मजबूत करना, स्थानीय खुफिया तंत्र को आधुनिक बनाना, आतंक के आर्थिक नेटवर्क को तोड़ना और जम्मू-कश्मीर में विकास की गति बनाए रखना ही सबसे प्रभावी जवाब है।


भारत को अब दुनिया के सामने यह स्पष्ट करना होगा कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। जो देश आतंकियों को पालता है, उसे केवल निंदा नहीं, वैश्विक स्तर पर राजनीतिक और आर्थिक कीमत भी चुकानी चाहिए।


आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, लेकिन आतंकवाद का संरक्षक जरूर होता है। अब समय आ गया है कि दुनिया उस संरक्षक का नाम लेकर उसके खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे। यही निर्दोषों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि और मानवता के प्रति वास्तविक दायित्व होगा।

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