धनियामऊ में 21 जहाज, 100 से ज्यादा कंपनियां; हर घर की कहानी समुद्र से जुड़ी
जौनपुर। आमतौर पर गांवों की पहचान खेती, पशुपालन और जमीन से होती है, लेकिन जौनपुर का धनियामऊ इस परंपरागत तस्वीर को बदल चुका है। वाराणसी-सुल्तानपुर राष्ट्रीय राजमार्ग के किनारे बसे इस गांव को स्थानीय लोग अब ‘जहाज वाला गांव’ कहते हैं। दो हजार से ज्यादा आबादी वाले धनियामऊ के लोगों ने खेतों से आगे बढ़कर समुद्री कारोबार में अपनी अलग पहचान बनाई है।
गांव के लोगों के पास 21 पानी के जहाज और 100 से ज्यादा शिपिंग कंपनियां होने का दावा किया गया है। मंगरू मिश्रा के पास 10, आद्या प्रसाद मिश्रा के पास 5, जबकि प्रेम शंकर मिश्रा और बृजेश मिश्रा के पास तीन-तीन जहाज बताए गए हैं। गांव और आसपास के इलाकों के तीन हजार से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में शिपिंग क्षेत्र से जुड़े हैं।
इस बदलाव की शुरुआत करीब आठ दशक पहले हुई। प्रेम शंकर मिश्रा के अनुसार उनके पिता भोला नाथ मिश्रा ने 1948 में मानकेश्वर मैकेनिकल कंपनी शुरू की और गांव के लोगों व रिश्तेदारों को मुंबई ले जाकर जहाजों से जुड़े काम का प्रशिक्षण दिलाया। धीरे-धीरे एक परिवार का रोजगार पूरे गांव की आर्थिक पहचान बन गया।
आज धनियामऊ में 100 से ज्यादा बीटेक पास युवा बताए जाते हैं। गांव के युवाओं के लिए मुंबई और दूसरे शहरों से होते हुए दुनिया के समुद्री रास्तों तक पहुंचना रोजगार का बड़ा जरिया बन चुका है। जहाजों पर मैकेनिक, इंजीनियर, क्रू सदस्य, सुरक्षा इंजीनियर, कप्तान और अन्य पदों पर लोग काम कर रहे हैं।
दिलचस्प बात यह भी है कि गांव के प्रधान के अनुसार यहां एक हजार से ज्यादा लोगों के पास पासपोर्ट हैं। यानी जिस गांव की पहचान कभी खेतों से थी, वहां अब लोगों की बातचीत में फसल से ज्यादा जहाज और समुद्र दिखाई देते हैं।

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