नई दिल्ली। लोकसभा ने एक महत्वपूर्ण विधेयक पारित कर दिया है, जिसके तहत केंद्र सरकार को भविष्य में बैंकों और अन्य अधिकृत भुगतान सेवा प्रदाताओं को यूपीआई तथा अधिसूचित डिजिटल भुगतान माध्यमों पर शुल्क लगाने की अनुमति देने का अधिकार मिलेगा। यह विधेयक तत्काल शुल्क लागू नहीं करता, बल्कि सरकार को ऐसा करने के लिए कानूनी अधिकार प्रदान करता है।
विधेयक को लेकर उठी आशंकाओं के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया है कि यदि भविष्य में मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लागू किया जाता है, तो उसका भार आम उपभोक्ताओं पर नहीं, बल्कि व्यापारियों पर होगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम डिजिटल भुगतान प्रणाली को दीर्घकाल में आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने की दिशा में उठाया गया है। हालांकि, शुल्क कब, किस प्रकार और किन लेनदेन पर लागू होगा, इसका अंतिम निर्णय केंद्र सरकार बाद में अधिसूचना के माध्यम से करेगी।

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