नई दिल्ली। विदेश से चिकित्सा की पढ़ाई पूरी कर भारत लौटे डॉक्टरों और मेडिकल छात्रों ने एफएमजीई परीक्षा के परिणाम और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर विरोध शुरू कर दिया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस बार परीक्षा में कुछ प्रश्न गलत थे, जबकि वीडियो आधारित प्रश्नों में उत्तर देने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उनका दावा है कि इन खामियों का असर बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों के परिणाम पर पड़ा।
विदेश से मेडिकल डिग्री हासिल करने वाले विद्यार्थियों को भारत में चिकित्सा पेशे में आगे बढ़ने के लिए विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा पास करना जरूरी है। यह परीक्षा राष्ट्रीय परीक्षा बोर्ड चिकित्सा विज्ञान द्वारा आयोजित की जाती है। प्रदर्शनकारियों के मुताबिक इस बार परीक्षा का परिणाम बेहद कम रहा और करीब 40 हजार विदेशी चिकित्सा स्नातक इससे प्रभावित हैं।
मांगों को लेकर डॉक्टर और छात्र दिल्ली के गौतम नगर स्थित महाराजा रणजीत सिंह पार्क में धरने पर बैठे हैं। प्रदर्शन में कुछ अभ्यर्थी भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्ष समीक्षा हो, कथित गलत प्रश्नों की जांच की जाए और तकनीकी तथा समय संबंधी खामियों पर उचित राहत दी जाए।
प्रदर्शनकारियों का यह भी कहना है कि उन्हें प्रश्नपत्र की प्रति उपलब्ध नहीं कराई जा रही है। उनका दावा है कि परीक्षा आयोजित करने वाली संस्था ने कुछ प्रश्नों में गलती होने की बात स्वीकार की है। हालांकि इन दावों पर संबंधित संस्थाओं का आधिकारिक पक्ष सामने आना महत्वपूर्ण होगा।
प्रदर्शन के मुख्य संयोजक का कहना है कि जब तक विद्यार्थियों को उचित न्याय नहीं मिलता, आंदोलन जारी रहेगा। अब सवाल सिर्फ कम परिणाम का नहीं, बल्कि परीक्षा की पारदर्शिता और अभ्यर्थियों की शिकायतों की स्वतंत्र समीक्षा का भी है।

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