प्रयागराज। कई दिनों तक उफान पर रहने के बाद गंगा-यमुना के जलस्तर में कमी तो आई है, लेकिन अब दोनों नदियों की रफ्तार ने प्रशासन और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की चिंता फिर बढ़ा दी है। 25 अगस्त तक उपलब्ध आंकड़ों में गंगा और यमुना का जलस्तर लगातार तीसरे दिन नीचे आया था, हालांकि गिरावट की गति को लेकर लोग अभी भी सतर्क हैं।
केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार 25 अगस्त को फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 80.69 मीटर, छतनाग में 79.28 मीटर और नैनी में यमुना का जलस्तर 79.74 मीटर दर्ज किया गया। पिछले 24 घंटे में फाफामऊ की गंगा में करीब 42 सेंटीमीटर और नैनी की यमुना में भी करीब 42 सेंटीमीटर की कमी दर्ज हुई थी।
इससे पहले बाढ़ के दौरान संगम क्षेत्र और निचले इलाकों में पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हुआ था। कई स्थानों पर सड़कें जलमग्न हुईं और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। अब पानी घटने से राहत जरूर है, लेकिन नदी किनारे रहने वाले लोग जल्दबाजी में सामान्य स्थिति मानने के बजाय ‘देखो और इंतजार करो’ की स्थिति में हैं।
प्रशासन भी जलस्तर और बारिश की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में दोनों नदियों के घटते जलस्तर से राहत के संकेत हैं, लेकिन मौसम और ऊपरी क्षेत्रों से आने वाले पानी के कारण स्थिति बदल सकती है।
ऐसे में प्रयागराज के लोगों के लिए राहत जरूर आई है, मगर बाढ़ का खतरा पूरी तरह खत्म मानना अभी जल्दबाजी होगी।

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