नई दिल्ली। भारत और बांग्लादेश के बीच वर्ष 2026 में समाप्त होने वाली फरक्का जल संधि को लेकर संसद में नई बहस शुरू हो गई है। राज्यसभा में एक एनडीए सांसद ने केंद्र सरकार से संधि का नवीनीकरण नहीं करने की मांग करते हुए कहा कि राष्ट्रीय हितों और जल संसाधनों की वर्तमान आवश्यकताओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
सांसद का तर्क था कि बदलते हालात और देश के बढ़ते जल संकट को देखते हुए संधि की शर्तों की नए सिरे से समीक्षा आवश्यक है। उनका कहना था कि भारत के सीमावर्ती राज्यों की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
हालांकि, इस मुद्दे पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक संधि को समाप्त करने या नवीनीकरण न करने का कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। भारत और बांग्लादेश के बीच जल बंटवारे से जुड़े मामलों पर दोनों देशों के बीच समय-समय पर कूटनीतिक स्तर पर बातचीत होती रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि फरक्का जल संधि केवल जल बंटवारे का विषय नहीं, बल्कि भारत-बांग्लादेश संबंधों का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इस संबंध में कोई भी निर्णय दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग को ध्यान में रखकर ही लिया जाएगा।
ध्यान दें: फिलहाल यह एक सांसद की मांग है। भारत सरकार ने अभी तक फरक्का जल संधि को समाप्त करने या उसका नवीनीकरण न करने की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है।

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