494 करोड़ के निर्माण खर्च और सांसद-विधायक निधि के इस्तेमाल के दावों ने बढ़ाई जांच की गंभीरता
रामपुर। मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े धन शोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय की कार्रवाई के बाद निर्माण में लगी रकम के स्रोत को लेकर बड़े सवाल सामने आए हैं। ईडी की हालिया तलाशी में सरकारी ठेकों की रकम को कथित तौर पर निजी ठेकेदारों के जरिए ट्रस्ट या विश्वविद्यालय से जुड़े निर्माण कार्यों तक पहुंचाए जाने के वित्तीय सुराग मिलने की बात सामने आई है।
जांच का एक अहम बिंदु विश्वविद्यालय के निर्माण पर खर्च हुई रकम है। उपलब्ध जांच संबंधी रिपोर्टों के अनुसार ट्रस्ट की ओर से निर्माण लागत करीब 45 करोड़ रुपये बताई गई थी, जबकि जांच में 59 भवनों की अनुमानित लागत करीब 494 करोड़ रुपये सामने आने का दावा किया गया है। यही बड़ा अंतर अब रकम के वास्तविक स्रोत और उसके इस्तेमाल को लेकर जांच का केंद्र है।
मामले को और गंभीर बनाता है सरकारी धन से जुड़े लेनदेन का सवाल। जांच रिपोर्टों में आठ सरकारी विभागों से जुड़े धन के विश्वविद्यालय निर्माण में इस्तेमाल की पड़ताल का उल्लेख है। इसके अलावा सांसद और विधायक निधि से करीब 4.57 करोड़ रुपये विश्वविद्यालय के विभिन्न निर्माण कार्यों में लगाए जाने की जानकारी भी सामने आ चुकी है। हालांकि इन निधियों के इस्तेमाल को लेकर पहले न्यायिक स्तर पर आपत्तियां उठीं और रकम वापस किए जाने की बात भी सामने आई थी।
ईडी अब ठेकेदारों, निर्माण कंपनियों, ट्रस्ट से जुड़े लोगों और कथित दानदाताओं के बीच हुए लेनदेन की कड़ियां जोड़ रही है। एजेंसी का फोकस यह पता लगाने पर है कि सरकारी ठेकों से हासिल रकम का कोई हिस्सा वास्तव में ट्रस्ट या विश्वविद्यालय तक पहुंचा या नहीं और यदि पहुंचा तो उसका वास्तविक स्वरूप क्या था।
अब जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है—जौहर यूनिवर्सिटी की विशाल इमारतों में लगी रकम आखिर आई कहां से? ईडी की जांच आगे बढ़ने के साथ सरकारी धन, ठेकेदारों के भुगतान, दान और निर्माण खर्च के बीच की पूरी वित्तीय कड़ी सामने आने की संभावना है।

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