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दतिया दंगल के बाद दिल्ली दौड़! शाह से मिले कैलाश, मोदी से मिले शिवराज, नरोत्तम भी पहुंचे दिल्ली

 

प्रणव बजाज


नई दिल्ली/भोपाल। दतिया विधानसभा उपचुनाव में भारतीय जनता पार्टी की हार के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में गतिविधियां तेज हो गई हैं। एक ओर प्रदेश संगठन हार की समीक्षा में जुटा है, वहीं दूसरी ओर दिल्ली में शीर्ष नेतृत्व से लगातार हो रही मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को नया आयाम दे दिया है।



सबसे पहले केंद्रीय मंत्री **** की प्रधानमंत्री **** से मुलाकात की तस्वीरें सामने आईं। इसके बाद प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री **** ने केंद्रीय गृह मंत्री **** से भेंट की। इसी बीच पूर्व गृह मंत्री **** भी भोपाल से दिल्ली रवाना हो गए।


हार के बाद समीक्षा और दिल्ली की सक्रियता


सूत्रों के अनुसार दतिया उपचुनाव में हार के कारणों पर प्रदेश भाजपा ने विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजी है। इसमें संगठनात्मक कमजोरियां, स्थानीय समीकरण, चुनावी रणनीति और बूथ प्रबंधन सहित कई बिंदुओं का उल्लेख किए जाने की चर्चा है।


राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि लगातार हो रही इन मुलाकातों को केवल औपचारिक शिष्टाचार मानना आसान नहीं है। हालांकि भाजपा की ओर से इन बैठकों को लेकर किसी विशेष राजनीतिक एजेंडे की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।


कैलाश–शाह मुलाकात के मायने


कैलाश विजयवर्गीय और अमित शाह की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं। दतिया चुनाव में कथित भीतरघात, संगठनात्मक फैसलों और भविष्य की रणनीति को लेकर अलग-अलग कयास लगाए जा रहे हैं। हालांकि बैठक में किन विषयों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।

शिवराज की मोदी से मुलाकात भी चर्चा में


इससे पहले शिवराज सिंह चौहान और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं। विपक्ष ने इन मुलाकातों को लेकर राजनीतिक टिप्पणी की, जबकि भाजपा की ओर से इन्हें सामान्य और नियमित बैठक बताया गया।

नरोत्तम मिश्रा का संदेश


उपचुनाव परिणाम आने के बाद सार्वजनिक रूप से अधिक प्रतिक्रिया न देने वाले नरोत्तम मिश्रा ने दिल्ली रवाना होने से पहले भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी से मुलाकात की। इसे पार्टी के प्रति समर्थन और संगठन के साथ खड़े रहने के संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

आगे क्या

दतिया उपचुनाव की हार के बाद प्रदेश भाजपा के भीतर संगठनात्मक समीक्षा जारी है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि केंद्रीय नेतृत्व इस रिपोर्ट पर क्या निर्णय लेता है और क्या आने वाले दिनों में संगठन या रणनीति में कोई बदलाव देखने को मिलता है। फिलहाल दिल्ली में नेताओं की सक्रियता ने मध्यप्रदेश की राजनीति का तापमान जरूर बढ़ा दिया है।

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