इंदौर में घी के नाम पर सेहत से खिलवाड़

50 में से 8 नमूने प्रयोगशाला में फेल, ‘असुरक्षित’ घोषित; नामी ब्रांड और डेयरियां भी जांच के घेरे में



इंदौर। शहर में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा लिए गए घी के नमूनों में से 50 में 8 नमूने राज्य स्तरीय प्रयोगशाला, भोपाल की जांच में फेल पाए गए हैं। जांच रिपोर्ट में इन नमूनों को ‘असुरक्षित’ घोषित किया गया है।


जानकारी के मुताबिक खाद्य सुरक्षा अधिकारियों ने लसूड़िया मोरी और तलावली चांदा क्षेत्र के गोदामों से विभिन्न ब्रांड के घी के नमूने लिए थे। इसके अलावा विजयनगर क्षेत्र की डेयरियों से भी घी के नमूने लिए गए। इन नमूनों को जांच के लिए भोपाल स्थित राज्य स्तरीय प्रयोगशाला भेजा गया था।


प्रयोगशाला से रिपोर्ट आने के बाद आठ नमूनों के मानकों पर खरा नहीं उतरने की पुष्टि हुई। खास बात यह है कि जांच के दायरे में केवल स्थानीय डेयरियां ही नहीं, बल्कि बाजार में पहचान रखने वाले ब्रांडों के उत्पाद भी आए हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि आखिर पैकिंग और ब्रांड के भरोसे खरीदे जाने वाले घी की गुणवत्ता की निगरानी कितनी प्रभावी है।


सवाल सिर्फ आठ नमूनों का नहीं


घी सीधे तौर पर लोगों के रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है। ऐसे में यदि खाद्य सुरक्षा जांच में किसी नमूने को ‘असुरक्षित’ घोषित किया जाता है तो मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य और बाजार में बिक रहे खाद्य पदार्थों की निगरानी से जुड़ जाता है।


सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिन प्रतिष्ठानों या ब्रांडों के नमूने असुरक्षित पाए गए, वहां से यह उत्पाद कितनी मात्रा में बाजार में पहुंचा और कितने उपभोक्ताओं ने इसे खरीदा? विभाग ने संबंधित नमूनों की रिपोर्ट के आधार पर क्या कार्रवाई की और बाजार से संदिग्ध उत्पाद वापस कराने के लिए क्या कदम उठाए गए—यह जानकारी भी सार्वजनिक होना जरूरी है।


जांच की रफ्तार पर भी सवाल


खाद्य पदार्थों के नमूने लेना और उन्हें प्रयोगशाला भेजना कार्रवाई का पहला चरण है। असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है। यदि प्रयोगशाला रिपोर्ट में उत्पाद असुरक्षित साबित होता है तो जिम्मेदार निर्माता, विक्रेता या आपूर्तिकर्ता के खिलाफ कार्रवाई और बाजार में उपलब्ध स्टॉक की निगरानी उतनी ही महत्वपूर्ण है।


इंदौर में समय-समय पर दूध, घी, मिठाई और अन्य खाद्य पदार्थों के नमूनों को लेकर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में आठ घी के नमूनों का असुरक्षित पाया जाना खाद्य सुरक्षा विभाग की नियमित निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।


अब सवाल यह है—जिन आठ नमूनों को ‘असुरक्षित’ घोषित किया गया, उनके पीछे कौन जिम्मेदार है और कार्रवाई कितनी हुई? विभाग को रिपोर्ट के आधार पर संबंधित ब्रांड, डेयरी और गोदामों के नाम, नमूने की जांच में सामने आई कमी तथा की गई कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि उपभोक्ताओं को भी पता चले कि उनकी थाली तक पहुंच रहे घी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन कितना गंभीर है।

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