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नर्मदापुर पंचायत में 2.07 करोड़ का बड़ा खेल!

बिना काम कराए भुगतान और दस्तावेजों के बिना निकासी का आरोप; सरपंच, सचिव और फर्मों को तीन दिन में जवाब का नोटिस



अंबिकापुर। मैनपाट की नर्मदापुर ग्राम पंचायत में करीब 2.07 करोड़ रुपये की वित्तीय अनियमितता सामने आने के बाद प्रशासन ने पंचायत से जुड़े जिम्मेदार लोगों और संबंधित फर्मों पर शिकंजा कस दिया है। आरोप है कि पंचायत में कई ऐसे निर्माण कार्यों के नाम पर राशि निकाल ली गई, जिनके मौके पर काम होने के प्रमाण नहीं मिले। वहीं कुछ मामलों में आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने के बावजूद भुगतान किए जाने की बात सामने आई है।


प्रशासन की कार्रवाई के तहत सरपंच, पंचायत सचिवों और संबंधित वेंडरों को नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा गया है। अब उनके जवाब और उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।


कागजों में काम, जमीन पर सवाल


मामले में सबसे गंभीर सवाल उन भुगतानों को लेकर है, जिनके एवज में वास्तविक निर्माण कार्य होने पर ही राशि खर्च की जानी थी। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होता है कि बिना काम कराए सरकारी राशि निकाल ली गई, तो यह केवल प्रक्रियागत चूक नहीं बल्कि सरकारी धन के दुरुपयोग का गंभीर मामला बन सकता है।


दूसरी ओर, दस्तावेजों के बिना भुगतान किए जाने की शिकायत ने पंचायत स्तर पर वित्तीय निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। पंचायतों में विकास कार्यों के लिए जारी राशि के उपयोग और भुगतान की प्रक्रिया में कई स्तरों पर सत्यापन होना चाहिए। इसके बावजूद इतनी बड़ी राशि की निकासी कैसे हुई, यह जांच का महत्वपूर्ण बिंदु है।


कई लोग जांच के घेरे में


प्रशासन ने कार्रवाई का दायरा केवल पंचायत के पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रखा है। संबंधित वेंडरों और फर्मों को भी नोटिस जारी किए गए हैं। इससे संकेत मिलता है कि जांच में भुगतान प्राप्त करने वाली संस्थाओं की भूमिका भी देखी जा रही है।

अब प्रशासन के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि 2.07 करोड़ रुपये की पूरी राशि किन-किन कार्यों, बिलों और फर्मों के माध्यम से निकाली गई, वास्तविक काम कितना हुआ और भुगतान की स्वीकृति किस स्तर पर दी गई।

तीन दिन में जवाब, फिर क्या?

नोटिस जारी होना कार्रवाई का अंतिम चरण नहीं है। प्रशासन द्वारा मांगे गए जवाब के बाद अभिलेखों का सत्यापन और मौके पर हुए कार्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी। यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो संबंधित लोगों से राशि की वसूली, विभागीय कार्रवाई और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है।


सबसे बड़ा सवाल यही है—पंचायत की 2.07 करोड़ रुपये की राशि खर्च होने तक निगरानी करने वाले अधिकारी और जिम्मेदार तंत्र कहां था? अब तीन दिन में मिलने वाले जवाब के बाद यह साफ होगा कि यह महज वित्तीय अनियमितता थी या सरकारी खजाने को सुनियोजित तरीके से नुकसान पहुंचाने का मामला।

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