संसद में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य लंबित मामलों का बोझ कम करना और न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना है, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि इतना महत्वपूर्ण विधेयक बिना पर्याप्त चर्चा के पारित कराया गया।
क्या है विधेयक?
विधेयक के तहत सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश के अलावा न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी।
यानी अब कुल स्वीकृत क्षमता 38 न्यायाधीश (मुख्य न्यायाधीश सहित) होगी।
बवाल क्यों मचा?
विपक्ष का आरोप है कि विधेयक पर विस्तृत चर्चा नहीं कराई गई।
सदन में अन्य राजनीतिक मुद्दों पर हंगामे के बीच इसे जल्दबाजी में पारित किए जाने को लेकर सवाल उठाए गए।
सरकार का तर्क है कि न्यायपालिका में बढ़ते लंबित मामलों को देखते हुए न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना तत्काल आवश्यक था।
कानून से क्या बदलेगा?
सुप्रीम कोर्ट अधिक पीठों का गठन कर सकेगा।
मामलों की सुनवाई और निपटारे की गति बढ़ने की उम्मीद है।
लंबित मामलों का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।
नागरिकों को अपेक्षाकृत जल्दी न्याय मिलने की संभावना बढ़ेगी।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने से ही समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी। न्यायाधीशों के रिक्त पदों को समय पर भरना, पर्याप्त न्यायिक ढांचा और आधुनिक तकनीक का प्रभावी उपयोग भी उतना ही आवश्यक है।

Post a Comment