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जीतू यादव की वापसी पर कालरा का विस्फोट: ‘गुंडा तत्वों को पार्टी से बाहर करो’



इंदौर। भाजपा में जीतू यादव (जाटव) की 19 महीने बाद वापसी ने इंदौर की राजनीति में दबे विवाद को फिर भड़का दिया है। वार्ड 65 के भाजपा पार्षद कमलेश कालरा ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को पत्र लिखकर जीतू यादव को पार्टी में दोबारा शामिल किए जाने पर खुली आपत्ति जताई है। कालरा ने सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति पर गंभीर आरोप लगे और जिसका मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में है, उसकी वापसी की जरूरत आखिर क्यों पड़ी?



जनवरी 2025 में ऑडियो विवाद के बाद कालरा के घर पर हुए हमले ने इंदौर की राजनीति में बड़ा तूफान खड़ा कर दिया था। इस मामले में जीतू यादव पर आरोप लगे थे। इसके बाद भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए निष्कासित कर दिया था और एमआईसी सदस्य का पद भी चला गया था।


अब पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद 18 अगस्त को भाजपा ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया। यही फैसला कालरा के विरोध का कारण बना है।


कालरा ने अपने पत्र में घटना को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि उनका परिवार आज तक उस घटना से बाहर नहीं निकल पाया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि संबंधित प्रकरण अभी अदालत में लंबित है और आवाज के नमूनों की रिपोर्ट भी सामने नहीं आई है। ऐसे में राजनीतिक वापसी पर उन्होंने पार्टी नेतृत्व से जवाब मांगा है।


कालरा ने पत्र में बेहद तीखे शब्दों में जीतू यादव को ‘गुंडा’ बताते हुए पूछा कि आखिर भाजपा की ऐसी क्या मजबूरी थी कि उन्हें दोबारा पार्टी में जगह दी गई। उन्होंने कथित राजनीतिक संरक्षण पर भी सवाल उठाए और मांग की कि ऐसे तत्वों को पार्टी से बाहर रखा जाए।


इधर, विवाद दोबारा न बढ़े, इसलिए जीतू यादव को फिलहाल महापौर परिषद में स्थान नहीं देने की बात सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार पार्टी नेतृत्व ने इस संबंध में स्थानीय संगठन को निर्देश दिए हैं।


अब असली सवाल यही है—भाजपा ने जिस विवाद के बाद कार्रवाई की थी, क्या राजनीतिक वापसी से वह विवाद खत्म हो गया या पार्टी के भीतर एक नया मोर्चा खुल गया?

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