दो गुट आमने-सामने, हजारों लोग सड़कों पर; भारी पुलिस बल तैनात
परीक्षित गुप्ता :मुंबई
मुंबई के मझगांव इलाके में रविवार देर रात गणपति प्रतिमा के आगमन जुलूस के दौरान कथित तौर पर अंडे फेंके जाने के बाद तनाव फैल गया। आरोप है कि जुलूस के दौरान पास की एक इमारत से अंडा फेंका गया, जिसके बाद जुलूस में शामिल लोगों ने विरोध जताया। देखते ही देखते विवाद बढ़ा और दो पक्ष आमने-सामने आ गए। करीब चार घंटे तक इलाके में तनाव और हंगामे की स्थिति बनी रही।
स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने भीड़ को शांत करने की कोशिश की और लोगों से नारेबाजी तथा किसी भी तरह का उपद्रव नहीं करने की अपील की। रिपोर्टों के अनुसार, करीब 10 से 15 हजार लोग इलाके में जमा हो गए थे। बाद में पुलिस ने भीड़ को हटाया और सोमवार सुबह तक स्थिति नियंत्रण में आ गई। एहतियात के तौर पर गणेश मंडप और आसपास के इलाके में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी
घटना को लेकर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि कथित तौर पर अंडा फेंकने वाले व्यक्ति की पहचान की जा सके। पुलिस का जोर फिलहाल स्थिति को शांत बनाए रखने और अफवाहों को फैलने से रोकने पर है।
गणपति मंडल से जुड़े पदाधिकारियों ने घटना पर नाराजगी जताते हुए आरोपियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई की मांग की है। वहीं पुलिस ने लोगों से कानून अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की है।
उत्सव से पहले कानून-व्यवस्था की चुनौती
यह घटना ऐसे समय हुई है जब मुंबई में गणेशोत्सव की तैयारियां जोर पकड़ रही हैं। ऐसे में मझगांव की घटना ने पुलिस-प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि अंडा किसने फेंका, विवाद किस तरह बढ़ा और इसके पीछे वास्तविक वजह क्या थी। पुलिस जांच और सीसीटीवी फुटेज से तस्वीर साफ होने का इंतजार है। जब तक जांच पूरी नहीं होती, किसी समुदाय या व्यक्ति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा।
संपादकीय सवाल: त्योहार आस्था और भाईचारे का अवसर हैं। एक छोटी घटना अगर हजारों लोगों को सड़क पर उतार दे, तो सवाल केवल आरोपी तक सीमित नहीं रहता—क्या प्रशासन को ऐसे संवेदनशील जुलूसों के दौरान पहले से सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी और मजबूत नहीं करनी चाहिए?

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