प्रणव बजाज
इंदौर। शहर की सड़कों पर बढ़ते यूनिपोल और विज्ञापन ठेकों की प्रक्रिया अब सवालों के घेरे में है। आरोप है कि नगर निगम के मार्केट विभाग ने एक विशेष एजेंसी को लगातार लाभ पहुंचाने वाली कार्यप्रणाली अपनाई, जबकि अन्य एजेंसियों के लिए नियमों की सख्ती दिखाई गई।
वर्ष 2021 में जारी विज्ञापन निविदा प्रक्रिया को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर एक ही एजेंसी को बार-बार समय विस्तार और अवसर क्यों दिए गए? आरोप है कि नियमों के अनुसार सीमित अवधि में पूरी होने वाली प्रक्रिया को वर्षों तक आगे बढ़ाया गया।
क्या निगम प्रशासन की नजरों के सामने चलता रहा पूरा खेल?
इस पूरे मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और निगम आयुक्त क्षितिज सिंघल की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विपक्ष और शहर के जागरूक नागरिकों का कहना है कि यदि विभागीय स्तर पर नियमों की अनदेखी हुई तो शीर्ष प्रशासन को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
सवाल यह भी है कि क्या निगम प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की या फिर फाइलें केवल विभागीय स्तर पर ही घूमती रहीं?
एक एजेंसी को फायदा पहुंचाने का आरोप
आरोप है कि पूर्व नाम सुपीरियर सर्विसेज एडवरटाइजिंग कंपनी और वर्तमान में पीआरजे ओओएच से जुड़ी एजेंसी को बार-बार राहत दी गई। वहीं अन्य प्रतिस्पर्धी एजेंसियों को तकनीकी कमियों के आधार पर बाहर किए जाने की शिकायतें सामने आईं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह निगम की निविदा व्यवस्था और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
जांच की मांग तेज
शहर में अब मांग उठ रही है कि वर्ष 2021 से अब तक हुए सभी विज्ञापन ठेकों, समय विस्तार, अनुमति और यूनिपोल स्थापना की स्वतंत्र जांच कराई जाए।
जांच से ही तय होगा कि यह केवल प्रशासनिक लापरवाही थी या किसी को अनुचित लाभ पहुंचाने की कोशिश।

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