चंडीगढ़। हरियाणा सरकार अब बड़े निवेशकों और उद्योगपतियों तक सीधे पहुंच बनाने की तैयारी में है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से पहले मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद जैसे औद्योगिक केंद्रों में रोड शो और निवेशक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। सरकार उद्योगपतियों को केवल नीतियों का भरोसा देने के बजाय जमीन, बुनियादी ढांचा और समयबद्ध मंजूरियों की सुविधा उपलब्ध कराने पर जोर दे रही है।
सरकार ने ‘मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति’ के तहत करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा है। वहीं सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम तथा निर्यात संवर्धन नीति के माध्यम से करीब 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 5 लाख रोजगार का लक्ष्य है। यानी दोनों पहलों से कुल 10.55 लाख करोड़ रुपये निवेश और 15 लाख रोजगार जुटाने की योजना है।
निवेश प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए सरकार ने तैयार औद्योगिक भूखंडों और सुविधाओं पर भी जोर दिया है। हरियाणा के बजट दस्तावेज के अनुसार प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में तैयार कारखाने और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं विकसित की जाएंगी। निवेशकों के लिए भूमि व्यवहार्यता प्रमाणपत्र व्यवस्था तथा कई विभागों को एक जगह लाने वाली साझा औद्योगिक सचिवालय व्यवस्था का भी प्रस्ताव है।
निवेशकों को मंजूरियों में मदद देने के लिए उद्योग विभाग ने ऐसी एजेंसी की नियुक्ति की निविदा भी जारी की है, जो स्थापना-पूर्व और स्थापना-पश्चात नियामकीय मंजूरियों तथा अनापत्ति प्रमाणपत्रों में निवेशकों की सहायता करेगी।
सरकार की रणनीति साफ है—निवेशक हरियाणा आएं तो उन्हें जमीन तलाशने से लेकर परियोजना शुरू करने तक सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ें।

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