इलाहाबाद हाईकोर्ट का अहम फैसला, दत्तक बच्चा मृत पति का भी कानूनी संतान माना जाएगा
प्रयागराज। पति की मृत्यु के बाद यदि उसकी विधवा पत्नी किसी बच्चे को कानूनी रूप से गोद लेती है, तो क्या उस बच्चे का मृत पति की संपत्ति में अधिकार होगा? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सवाल पर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। अदालत ने माना कि वैध रूप से गोद लिया गया बच्चा दत्तक मां के परिवार का सदस्य बनता है और उसे मृत पति की संतान के रूप में भी कानूनी संबंध प्राप्त होते हैं।
हिंदू दत्तक एवं भरण-पोषण अधिनियम, 1956 की धारा 12 के अनुसार दत्तक बच्चा दत्तक माता-पिता की संतान माना जाता है। अदालतों ने पहले भी स्पष्ट किया है कि विधवा द्वारा बच्चे को गोद लेने पर उसका रिश्ता मृत पति के परिवार से भी जुड़ता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि दत्तक बच्चा पहले से किसी दूसरे व्यक्ति के नाम हो चुकी संपत्ति वापस ले सकता है। धारा 12 में ऐसे अधिकारों की भी सीमा निर्धारित है। इसलिए दत्तक ग्रहण की वैधता, संपत्ति कब अर्जित हुई और उत्तराधिकार कब खुला—ये सभी तथ्य महत्वपूर्ण होंगे।
फैसला उन परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है जहां पति की मृत्यु के बाद विधवा द्वारा दत्तक ग्रहण किया जाता है। इससे दत्तक बच्चों के उत्तराधिकार अधिकार को लेकर लंबे समय से चले आ रहे विवादों को कानूनी आधार मिलता है।

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