यूपी में कांवड़ यात्रा का 1,000 करोड़ का कारोबार, आस्था बनी बड़ी अर्थव्यवस्था

 


होटल, ढाबे, परिवहन से लेकर पूजा सामग्री तक हजारों कारोबारियों को मिलता है सीधा फायदा


लखनऊ। कांवड़ यात्रा अब सिर्फ धार्मिक आयोजन नहीं रही, बल्कि उत्तर प्रदेश के कई जिलों में यह बड़ी आर्थिक गतिविधि का रूप ले चुकी है। लखनऊ के गिरी इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज से जुड़ी 2024 की रिपोर्ट के अनुसार कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश में करीब 1,000 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान है। हालांकि यह औपचारिक सरकारी आर्थिक सर्वेक्षण नहीं, बल्कि यात्रा से जुड़े खर्च और कारोबार का अनुमान है।



कांवड़िए यात्रा के दौरान भोजन, पानी, कपड़े, पूजा सामग्री, गंगाजल रखने के पात्र और अन्य जरूरी सामान पर खर्च करते हैं। करीब 240 किलोमीटर लंबे कांवड़ मार्ग पर ढाबे, होटल, अस्थायी शिविर, फल विक्रेता और छोटे दुकानदारों की बिक्री बढ़ जाती है। एक कांवड़िए के यात्रा खर्च का अनुमान करीब 3,000 से 4,000 रुपये लगाया गया था।


इसका असर परिवहन और ईंधन कारोबार पर भी पड़ता है। बाइक, कार, बस और ट्रैक्टर-ट्रॉली से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के कारण पेट्रोल पंपों और परिवहन कारोबार को अतिरिक्त ग्राहक मिलते हैं।


2026 में भी कांवड़ यात्रा के दौरान बड़े पैमाने पर श्रद्धालुओं की आवाजाही जारी है। इससे साफ है कि आस्था के साथ जुड़ी यह यात्रा स्थानीय बाजार, छोटे कारोबार और अस्थायी रोजगार के लिए भी महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर बन चुकी है।

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