भारत की सबसे बड़ी ताकत मानी जाने वाली युवा आबादी को लेकर नीति आयोग के एक आंकड़े ने गंभीर चिंता खड़ी की है। रिपोर्ट के मुताबिक देश में 15 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 8.7 करोड़ युवा ऐसे हैं, जो न पढ़ाई कर रहे हैं, न रोजगार में हैं और न ही किसी तरह का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इन्हें सामान्य तौर पर ‘न तो शिक्षा, न रोजगार, न प्रशिक्षण’ की स्थिति में रहने वाले युवा माना जाता है।
यह आंकड़ा केवल बेरोजगारी की तस्वीर नहीं दिखाता, बल्कि युवाओं तक शिक्षा, कौशल प्रशिक्षण और रोजगार के अवसर पहुंचाने की चुनौती भी सामने रखता है। पढ़ाई छोड़ने के बाद बड़ी संख्या में युवाओं का कौशल प्रशिक्षण से बाहर रह जाना उनकी भविष्य की कमाई और रोजगार क्षमता को प्रभावित कर सकता है।
नीति आयोग ने ऐसे युवाओं को आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने के लिए सस्ती और आसानी से उपलब्ध कौशल प्रशिक्षण व्यवस्था को मजबूत करने की जरूरत बताई है। इसके साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और युवाओं को प्रशिक्षण के बाद काम से जोड़ने पर भी जोर जरूरी है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस देश में युवा आबादी को आर्थिक विकास का इंजन माना जाता है, वहां करोड़ों युवा शिक्षा और रोजगार की मुख्यधारा से बाहर क्यों हैं? केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरत इस बात की है कि प्रशिक्षण बाजार की वास्तविक मांग से जुड़ा हो और युवाओं को प्रशिक्षण के बाद स्थायी आय का रास्ता भी मिले।
यदि इस बड़ी आबादी को समय रहते अवसर नहीं मिले, तो जनसांख्यिकीय लाभ का फायदा उठाने के बजाय देश के सामने रोजगार और सामाजिक सुरक्षा की बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है।

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