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पैसा कम पड़ रहा है तो कमाई नहीं, खर्च का तरीका बदलें! जानें 80-20 नियम

 


हर महीने सैलरी आते ही खर्चों की लंबी सूची सामने आ जाती है और महीने के अंत तक खाता खाली नजर आने लगता है। ऐसे में अक्सर लगता है कि कमाई बढ़ेगी तभी बचत हो पाएगी। लेकिन जरूरी नहीं कि समस्या सिर्फ कम आय की हो। कई बार खर्चों का गलत बंटवारा भी आर्थिक दबाव बढ़ाता है। ऐसे में 80-20 नियम आपकी वित्तीय आदतों को समझने में मदद कर सकता है।



इस नियम के मुताबिक अपनी आय का करीब 80 प्रतिशत हिस्सा जरूरी खर्चों और जीवनशैली पर खर्च करने के बजाय पहले यह पहचानना जरूरी है कि पैसा सबसे ज्यादा किन मदों में जा रहा है। किराया, घर का खर्च, बच्चों की फीस, कर्ज की किस्त और जरूरी बिल जैसे खर्च अलग रखें। इसके बाद ऑनलाइन खरीदारी, बाहर खाना, मनोरंजन, अनावश्यक सदस्यता और छोटे-छोटे बार-बार होने वाले खर्चों की समीक्षा करें।


अगर आपकी आय का 20 प्रतिशत हिस्सा नियमित रूप से बचत और निवेश के लिए अलग हो जाए तो धीरे-धीरे आर्थिक सुरक्षा मजबूत हो सकती है। शुरुआत में 20 प्रतिशत बचाना मुश्किल हो तो छोटी राशि से शुरुआत करें और हर कुछ महीनों में इसे बढ़ाएं।


सबसे जरूरी बात यह है कि बजट बनाने से पहले पिछले दो-तीन महीनों के खर्चों का हिसाब देखें। अक्सर बड़ी बचत किसी एक बड़े खर्च को रोकने से नहीं, बल्कि कई छोटे गैरजरूरी खर्चों को नियंत्रित करने से होती है।


इसलिए कमाई बढ़ने का इंतजार करने के बजाय पहले यह देखें कि आपकी मौजूदा आय कहां और कितनी खर्च हो रही है। सही खर्च प्रबंधन से वही कमाई ज्यादा उपयोगी साबित हो सकती है।

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