कन्नड़ सिनेमा के सुपरस्टार आज देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। लेकिन उनका सफर सीधे फिल्मों से शुरू नहीं हुआ था। उन्होंने टेलीविजन से अभिनय की दुनिया में कदम रखा और शुरुआती दौर में उन्हें ऐसे फैसले लेने पड़े, जिनकी वजह से कई लोग उन्हें घमंडी तक समझने लगे थे।
यश ने अपने करियर के शुरुआती दिनों में कुछ टीवी धारावाहिकों में काम किया। इसी दौरान उन्हें फिल्मों में अभिनय के कई प्रस्ताव मिलने लगे। हालांकि, उन्होंने हर प्रस्ताव को स्वीकार करने के बजाय अपनी पसंद की भूमिकाओं का इंतजार करना बेहतर समझा। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, एक समय उन्होंने करीब सात फिल्मों के प्रस्ताव इसलिए ठुकरा दिए थे क्योंकि उन्हें लगता था कि उन भूमिकाओं में उनके लिए कुछ खास करने को नहीं था।
उनके इस रवैये को उस समय कुछ लोगों ने अहंकार के तौर पर देखा। लेकिन यश का कहना था कि वह केवल फिल्म में काम करने के लिए फिल्म नहीं करना चाहते थे। वह ऐसी भूमिका चाहते थे जो उनके अभिनय को पहचान दे और उन्हें आगे बढ़ने का मौका मिले।
बाद में उन्हें कन्नड़ फिल्मों में लगातार बेहतर अवसर मिले और ‘मिस्टर एंड मिसेज रामाचारी’ ने उनके करियर को नई ऊंचाई दी। इसके बाद ‘केजीएफ’ ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सुपरस्टार बना दिया।
यश की कहानी इस बात का उदाहरण है कि करियर के शुरुआती दौर में हर अवसर स्वीकार करना जरूरी नहीं होता। कभी-कभी सही भूमिका के लिए इंतजार और अपने फैसले पर टिके रहना भी सफलता का रास्ता बन सकता है।

Post a Comment